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5 राशन दुकान संचालक FIR की राडार में,80 से 90 लाख की वसूली,राशन वितरण न करके खुले बाजार में भेच दिया गया था. ?

5 राशन दुकान संचालक FIR की राडार में,80 से 90 लाख की वसूली,राशन वितरण न करके खुले बाजार में भेच दिया गया था.

चावल शार्टेज के वर्षों पुराने मामले में पुलिस की जांच जारी

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कोरबा/ बता दें कि लगातर क्षेत्र में राशन दुकान संचालक के द्वारा अनियमितता की जा रही है, जहाँ 5 से 6 साल पूर्व तत्कालीन उचित मूल्य दुकान के संचालकों द्वारा किए गए गड़बड़झाले पर अब जाकर कार्यवाही की रफ्तार बढ़ी है। रिकव्हरी का नोटिस जारी करने के बाद भी राशि जमा नहीं करने वालों को अब या तो रकम जमा करनी होगी या फिर इनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लिखित शिकायत पर पुलिस ने अपनी जांच व कार्यवाही को आगे बढ़ाया है। इस मामले में ज्ञात हुआ है कि करीब 5-6 साल पुराने प्रकरण में शासकीय उचित मूल्य की दुकान क्रमांक 551001051 साकेत नगर, 551001057 डिंगापुर, 551001052 भिलाईखुर्द, 551001017 पोड़ीबहार व 551001000 मानिकपुर दादरखुर्द के तत्कालीन संचालकों के द्वारा गड़बड़ी की गई थी। इनके द्वारा चावल वितरण न कर खुले बाजार में बेच दिया गया था। इसकी वजह से दुकान के रिकार्ड में चावल का शार्टेज बढ़ता चला गया। (हालाँकि शार्टेज की वजह में ट्रांसपोर्टिंग के दौरान बोरियों की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान बोरे फटने से चावल गिरने के कारण और बिना तौल के पीडीएस में डम्प करना भी शामिल है लेकिन यह अपेक्षाकृत कम मात्रा में होता है) । पीडीएस में जब बढ़ते शार्टेज की जांच हुई तो कई क्विंटल चावल कम पाया गया। इस पर तत्कालीन जांच अधिकारी ने शार्टेज मिले चावल की कीमत बाजार भाव से जोड़ते हुए वसूली का प्रकरण बनाया और फिर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ हुई। समय के साथ वसूली का प्रकरण धीरे-धीरे दब गया। कालांतर में जब पेंडिंग प्रकरणों की फाइल खुली तो इन पांचों दुकान का मामला ध्यान में आया और एसडीएम ने इनके लिए रिकव्हरी की नोटिस जारी की। कई नोटिस पर भी संबंधित लोगों ने राशि का भुगतान नहीं किया तो अब जाकर इनके विरूद्ध शिकायत संबंधित थाना-चौकी में लिखित में खाद्य विभाग की ओर से की गई है। पांचों दुकानदारों पर लगभग 80 से 90 लाख रुपए की कुल वसूली निकल रही है।
वसूली के चक्कर में कमीशन रोका वर्तमान संचालकों का
इस पूरे मामले में तत्कालीन गड़बड़ीकर्ताओं को रिकव्हरी के लिए नोटिस तो जारी किया गया है और विभागीय से लेकर पुलिस जांच की प्रक्रिया जारी है लेकिन इन सबके बीच वसूली अटके होने के कारण वर्तमान संचालकों का कमीशन रोक दिया गया है। इस संबंध में नागरिक आपूर्ति निगम को विभाग से पत्र लिखकर साकेत नगर, डिंगापुर, भिलाईखुर्द, पोड़ीबहार व मानिकपुर दादरखुर्द पीडीएस के वर्तमान संचालकों का कमीशन जारी नहीं करने कहा गया है। अब भला इस मामले में इनका क्या दोष?

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