शिक्षा विभाग की लापरवाही: जुलाई आ गया, अब तक बच्चों को किताबें नहीं…कौन है जिम्मेदार….?

- 📚 शिक्षा विभाग की लापरवाही: जुलाई आ गया, अब तक बच्चों को किताबें नहीं…कौन है जिम्मेदार….?
गौरेला-पेंड्रा मरवाही:- जिले के आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित अन्य शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथ में जुलाई तक किताबें नहीं पहुंची हैं। नया सत्र शुरू हुए एक महीना बीत गया, फिर भी शैक्षणिक पुस्तकें बच्चों को नहीं मिल पाई हैं। किताबों की स्कैनिंग न हो पाना इसका कारण बताया जा रहा है, लेकिन यह कारण बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा साबित हो रहा है।
बिना किताब पढ़ाई कैसे…?
शासन की ओर से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन पढ़ाई के सबसे जरूरी साधन – किताबें – ही समय पर नहीं दी जा रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बच्चे आखिर कैसे पढ़ाई करेंगे..? कई बच्चों ने किताबें न मिलने के कारण स्कूल जाना भी छोड़ दिया है….?
कौन है जिम्मेदार….?
इस लापरवाही के लिए शिक्षा विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन भी जिम्मेदार है। जून खत्म हो गया, जुलाई भी आ गया, लेकिन अधिकारी चुप बैठे हैं। तकनीकी बहानों के पीछे छुपकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
अभिभावकों की चिंता, शिक्षकों की मजबूरी…?
शिक्षक बिना किताबों के सीमित संसाधनों से पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर परेशान हैं। कई जगहों पर पालक निजी स्तर पर किताबें खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आत्मानंद स्कूलों में पाठ्यक्रम अलग होने के कारण किताबें बाजार में भी आसानी से नहीं मिल पा रही हैं।
क्या जल्द होगा समाधान...?
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या को कब गंभीरता से लेता है। यदि जल्द ही किताबें वितरित नहीं हुईं, तो इस सत्र में भी पढ़ाई का नुकसान होना तय है, और यह सत्र भी अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाएगा।
📌 प्रशासन से मांग:..?
किताबों की स्कैनिंग व वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता।
- बच्चों के हित में जवाबदेही तय कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
यदि समय पर पुस्तकें नहीं मिल पातीं, तो वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए..?





