गौरेला पेंड्रा मरवाही : खुले में फेंका जा रहा जिला अस्पताल का जैव अपशिष्ट कचरा सफाई को लेकर सिस्टम चरमराई सिविल सर्जन मामले मे पल्ला झाडे

गौरेला पेंड्रा मरवाही : एक ओर जहां सरकार साफ सफाई में करोड़ो रुपये खर्च कर रही है तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही की वजह से सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। मामला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला अस्पताल का है। जहाँ सफाई व्यवस्था इन दिनों लचर हो गई है। नियमित रूप से सफाई न होने से जिला अस्पताल के पीछे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। अस्पताल कर्मचारियों ने कचरे के ढेर लगा दिए हैं। इससे संक्रमण फैलने का अंदेशा भी हो गया है क्योंकि यह कचरा संक्रमित लोगों के इलाज से निकला हुआ कचरे का ढेर है। आने-जाने वालों को भी कचरे के कारण दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति यहां आए दिन बनी रहती है। इसके कारण मरीज और उनके परिजनों को दिक्कत हाेती है। कई बार प्रबंधन से इसकी शिकायत हो चुकी है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी सफाई कराने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को सब पता है। वे यहां से गुजरते भी हैं, पर अनदेखी क्यों करते हैं ये समझ से परे है। कुछ लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल जी से इस बात की शिकायत करने की बात कही है।
डॉ देवेंद्र पैकरा सिविल सर्जन से हमारे द्वारा अस्पताल साफ सफाई को लेकर बात किया गया तो साफ पल्ला झाडे कहे यह बात स्टेट को भी पता है अब “इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की अस्पताल की सफाई को लेकर क्या स्थिति होगा.? अस्पताल सफाई को लेकर अधिकारी इतनी लापरवाही क्यूँ है। जैविक कचरा से चारो ओर कई मीटर तक गंदी बदबू फैल रही है। कचरे का ढेर लगे रहने से लोगों के सामने संक्रमण बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग नही चेत रहा है। इस बारे में लोगों ने कई शिकायतें सीएमएचओ व सिविल सर्जन जीपीएस से भी की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई तक नहीं हुई।
क्या होता है बायोमेडिकल कचरा : बायोमेडिकल कचरा अस्पताल से निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ व कचरा होता है। जिसमें उपयोग की गई सूइयां, ग्लूकोज की बोतलें, एक्सपायरी दवाएं, दवाइयों के रैपर, मरीजों के डायपर, गंदे कपड़े, रक्त सनी रुई सहित मानव शरीर के सड़े गले अंग होते हैं। बायोमेडिकल कचरा या जैविक चिकित्सकीय कचरा हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ और गैस छोड़ता है। जिससे गंभीर बीमारियां और संक्रमण फैलने का खतरा हाो है। इस कचरे का उचित प्रबंध करना सभी अस्पतालों की जिम्मेदारी है और इसके लिए कड़े नियम बने हुए हैं।





