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मरवाही वन मंडल में 300 करोड़ का लैंटाना घोटाला — फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त कर्मचारियों और भ्रष्ट ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई ठप किसका..? संरक्षण से दबाई गई जांच ?

पेंड्रारोड़/मरवाही। मरवाही वन मंडल एक बार फिर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। क्षेत्रीय शिकायतकर्ता महर्षि गौतम ने वन मंडल मरवाही में व्याप्त भ्रष्टाचार, फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी करने वाले कर्मचारियों, और आरोप लगाया है कि विभाग ने जहाँ मोटरसाइकिल तक नहीं पहुँच सकती, वहाँ करोड़ों रुपये के खर्च दिखाते हुए पुरे प्रदेश से JCB मशीनों ला कर घास की सफाई कराए जाने का दावा किया है। इस पूरे प्रकरण में करीब 300 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। जो अपने आप मे बड़े पैमाने पर घोटाला, जैसे गंभीर मामलों पर जांच और कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है।

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, वनमंडलाधिकारी कार्यालय मरवाही द्वारा जारी पत्र क्रमांक 6326, दिनांक 12 सितंबर 2025 में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि वर्ष 2022–23 में लैंटाना जुलनुस एवं नदी तट वृक्षारोपण कार्य के तहत किए गए कामों के स्थलीय सत्यापन हेतु आदेश दिए गए थे। बावजूद इसके, अब तक किसी भी दोषी अधिकारी या ऑपरेटर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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वहीं दूसरी ओर, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी गौरेला–पेंड्रा–मरवाही कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक 2895/शिका./2025–26, दिनांक 05 अगस्त 2025 में फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस पत्र में साफ उल्लेख है कि शिकायतकर्ता महर्षि गौतम द्वारा की गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच की आवश्यकता है और नियमानुसार कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। 

शिकायतकर्ता महर्षि गौतम ने आरोप लगाया है कि मरवाही वन मंडल में लैंटाना घास कटाई और अन्य विकास कार्यों में लाखों रुपये के भ्रष्टाचार हुए हैं। उनके अनुसार, दोषी ऑपरेटर और संबंधित अधिकारी आज भी पद पर बने हुए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। गौतम ने आगे बताया कि गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन मंडल मरवाही को कुछ उच्च राजनीतिक नेताओं और विभागीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है और दोषी अब तक बच निकले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वे इन समस्त मामलों को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन मंत्री, नेता या अधिकारी के संरक्षण में मरवाही वन मंडल में भ्रष्टाचार पनप रहा है। जनता और क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता भी अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मरवाही वन मंडल में लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब सरकारी दस्तावेज़ों के सामने आने से यह मामला और गंभीर होता जा रहा है। यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला प्रदेश स्तर पर राजनीतिक रूप ले सकता है।

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