LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

तीन नाम वाले जिले की कहानी बकरी बाजार ठेका, रसूख और कार्रवाई की उलटी पड़ताल ,!

तीन नाम वाले जिले की कहानी बकरी बाजार ठेका, रसूख और कार्रवाई की उलटी पड़ताल ,!

छतीसगढ़ : – तीन नाम से पहचाने जाने वाले एक जिले की एक ग्राम पंचायत इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। वजह है बकरी बाजार का बहुचर्चित ठेका, उससे जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताएँ, और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई का क्रम। मामला सिर्फ एक पंचायत या एक ठेके तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि नियम बड़े हैं या रसूख?

ये खबर भी पढ़ें…
एडमिशन विवाद के बाद सक्रिय हुआ शिक्षा विभाग, जिला अस्पताल पहुंचे DEO रजनीश तिवारी, बीमार छात्र का जाना हालचाल
एडमिशन विवाद के बाद सक्रिय हुआ शिक्षा विभाग, जिला अस्पताल पहुंचे DEO रजनीश तिवारी, बीमार छात्र का जाना हालचाल
June 22, 2026
एडमिशन विवाद के बाद सक्रिय हुआ शिक्षा विभाग, जिला अस्पताल पहुंचे DEO रजनीश तिवारी, बीमार छात्र का जाना हालचाल बच्चे...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

50 लाख का ठेका और आधी वसूली की कहानी – !स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में लगने वाले बकरी बाजार का ठेका लगभग 50 लाख रुपये से अधिक में दिया गया था। आरोप है कि यह ठेका पहले एक युवक (पुत्र) के नाम स्वीकृत हुआ। लेकिन बाजार से होने वाली वास्तविक वसूली कथित तौर पर तय राशि के मुकाबले काफी कम रही पूरी ठेका राशि जमा नहीं हुई बकाया रहने के बावजूद न तो ठेका निरस्त हुआ न ही किसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चर्चा सामने आई यहीं से सवाल उठने शुरू हुए।

बकाया बेटे पर… नया ठेका पिता को ? –

ये खबर भी पढ़ें…
कोटमीकला ज्वेलरी व्यवसायी हत्याकांड में बड़ी सफलता: झारखंड से चांदी खरीददार गिरफ्तार, 1157 ग्राम चांदी बरामद
कोटमीकला ज्वेलरी व्यवसायी हत्याकांड में बड़ी सफलता: झारखंड से चांदी खरीददार गिरफ्तार, 1157 ग्राम चांदी बरामद
June 22, 2026
कोटमीकला ज्वेलरी व्यवसायी हत्याकांड में बड़ी सफलता: झारखंड से चांदी खरीददार गिरफ्तार, 1157 ग्राम चांदी बरामद गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के कोटमीकला...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अगले ठेका चक्र में जो हुआ, उसने मामले को और उलझा दिया। आरोप है कि पिछला बकाया साफ न होने के बावजूद उसी परिवार के दूसरे सदस्य (पिता) को फिर से लगभग उतनी ही बड़ी राशि पर ठेका दे दिया गया स्थानीय लोगों का कहना है कि यह महज़ संयोग नहीं लगता, बल्कि नियमों की अनदेखी और अंदरूनी सेटिंग की ओर इशारा करता है। सबसे बड़ा सवाल यही बनता है जिस परिवार की पिछली देनदारी साफ नहीं थी, उसे दोबारा पात्र कैसे माना गया?

शिकायत पहुँची जनपद तक, सचिव को नोटिस –

ये खबर भी पढ़ें…
सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है: व्यास अशोककृष्ण महाराज
सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है: व्यास अशोककृष्ण महाराज
June 22, 2026
सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है: व्यास अशोककृष्ण महाराज ""वन पूर्णाहुति भंडारा प्रसाद के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मामले ने तूल पकड़ा तो कुछ लोगों ने लिखित शिकायत जनपद पंचायत में दी। शिकायत में आरोप लगाए गए ठेका प्रक्रिया में अनियमितता बकाया राशि की अनदेखी परिवार विशेष को लाभ पहुँचाने का आरोप इसके बाद पंचायत सचिव को नोटिस जारी हुआ। जवाब भी प्रस्तुत किया गया। मामला आगे की जांच के लिए जिला स्तर पर भेजे जाने की बात सामने आई। यानी मामला प्रशासनिक फाइलों में दर्ज तो हुआ… लेकिन यहीं से कहानी मोड़ लेती है।

पार्ट–2 : चर्चित जिले की कहानी, जांच से पहले FIR ?

जैसे-जैसे शिकायत और खबरें बाहर आने लगीं, जिले में एक नई चर्चा शुरू हुई। लोगों के बीच यह आरोप तैरने लगा कि मामले को दबाने के प्रयास हुए जिम्मेदारी तय होने से पहले माहौल पलट गया इसी बीच एक और गंभीर आरोप चर्चा में आया। कहा गया कि जांच को प्रभावित करने के बदले कथित तौर पर “कागजों की मोटी गड्डी” का लेन-देन हुआ। राशि लगभग 4–5 लाख रुपये बताई जा रही है। यह दावा स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

शिकायतकर्ताओं और पत्रकारों पर ही केस ?
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जिन लोगों ने शिकायत की जिन पत्रकारों ने खबरें प्रकाशित कीं उन्हीं पर दबाव बढ़ा और फिर कथित तौर पर एक्सटॉर्शन जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार पहले थाने स्तर पर हलचल हुई
फिर ऊपर से निर्देश आने की चर्चा रही और उसके बाद मामला सीधे आपराधिक रंग ले बैठा

सबसे बड़ा सवाल यही जिस मामले में जांच की मांग थी, उसमें पहले जांच क्यों नहीं FIR क्यों ?

कानूनी जानकार कहते हैं कि सामान्य प्रक्रिया में शिकायत प्रारंभिक जांच जिम्मेदारी तय फिर कार्रवाई लेकिन यहाँ आरोप है कि क्रम उलटा दिख रहा है। तीन नाम वाले जिले की कहानी अब भी अधूरी है यह पूरा प्रकरण कई गंभीर सवाल छोड़ जाता है बकाया न चुकाने वाले परिवार को दोबारा ठेका कैसे मिला? ठेका पात्रता की जांच किस स्तर पर हुई ? शिकायत करने वालों पर ही आपराधिक केस क्यों दर्ज हुए ? जांच की दिशा तय कौन कर रहा है ? यह मामला सिर्फ एक बकरी बाजार का नहीं यह कहानी दरअसल उस सिस्टम पर सवाल है जहाँ ठेके कागज़ पर नियम से चलते हैं और ज़मीन पर रसूख से अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच फाइलों तक सीमित रहती है या सचमुच जिम्मेदारी तय होती है।

तीन नाम वाले जिले की यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है… शायद यह तो बस शुरुआत है।

Back to top button
error: Content is protected !!