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टपकती छतों में जी रहे बैगा परिवार, कहाँ गया सरकारी आवास? भ्रष्टाचार और वसूली का आरोप

मिथलेश आयम रायपुर(खबरों का राजा) : सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजनाएं काग़ज़ों में भले ही गरीब और आदिवासी परिवारों को पक्के मकान का सपना दिखाती हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत चपोरा के आश्रित ग्राम बासाझाल स्थित बैगा मोहल्ला इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां बैगा जनजाति परिवार आज भी अधूरे, जर्जर और रिसते मकानों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। जिन परिवारों को सम्मानपूर्वक और सुरक्षित जीवन देने के लिए सरकारी आवास स्वीकृत किए गए थे, वही परिवार आज डर और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। बरसात के मौसम में इन अधूरे मकानों की हालत और भी भयावह हो जाती है। छतों से पानी टपकता है, दीवारें सीलन से कमजोर हो चुकी हैं और घर का पूरा फर्श कीचड़ में तब्दील हो जाता है। पीड़ित हितग्राहियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया की पंचायत सचिव सुनीता मरावी द्वारा आवास निर्माण ठेके पर कराया गया। प्रत्येक हितग्राही से लगभग 2 लाख रुपये की पूरी राशि वसूल ली गई, लेकिन इसके बावजूद दो साल बीत जाने के बाद भी आवासों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। सवाल यह है की जब पूरी राशि ली जा चुकी थी, तो मकान आज तक पूरे क्यों नहीं हुए? बैगा समाज के अंजोर सिंह बैगा और फागुन सिंह बैगा ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि जो मकान बनाए भी गए हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद घटिया है। बारिश के दौरान घर में रहना असंभव हो जाता है। मजबूरी में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खुले में बैठकर या रात गुजारनी पड़ती है। जिन दीवारों को सुरक्षा का प्रतीक होना था, वही आज जान का खतरा बनी हुई हैं। बैगा मोहल्ले में ऐसे 7 से 8 आवास हैं, जिनकी हालत एक जैसी दयनीय है। यह स्थिति न केवल सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आदिवासी समाज के साथ हो रहे गंभीर अन्याय की ओर भी इशारा करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन गरीब आदिवासी परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी देकर आवास बनवाया, उनका दोष क्या था? अब ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनकी स्पष्ट मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और अधूरे पड़े आवासों को तत्काल पूर्ण कराया जाए। बैगा जनजाति भी इंसान है उन्हें भी सम्मान, सुरक्षा और एक सुरक्षित छत के नीचे जीने का पूरा अधिकार है।

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