वित्तीय अनियमितता मामले में गुरसिया सरपंच निलंबित, शिकायत पर एसडीएम मनोज बंजारे की बड़ी कार्रवाई

मिथलेश आयम की रिपोर्ट, कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा :- कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरसिया की सरपंच हेमलता बघेल को गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन के आरोपों के चलते अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोड़ी उपरोड़ा मनोज कुमार बंजारे ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह आदेश 10 जुलाई 2026 को जारी किया गया। आदेश के अनुसार, ग्रामवासियों द्वारा सरपंच के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता एवं पद के दुरुपयोग की शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा से विस्तृत जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन एवं आईडीबीआई बैंक, शाखा कोनकोना के बचत खाते के विवरण के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि तत्कालीन सचिव रविंद्र कुमार सिंह के साथ संयुक्त हस्ताक्षर का उपयोग करते हुए सरपंच द्वारा ग्राम पंचायत के शासकीय खाते से 37 लाख 26 हजार रुपये की राशि नियमों के विरुद्ध अपने निजी बचत खाते में स्थानांतरित कर ली गई। आदेश में उल्लेख है कि यह राशि स्वीकृत निर्माण कार्यों के लिए थी, जिसे निजी खाते में स्थानांतरित करना गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं गबन की श्रेणी में आता है। यह कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के वित्तीय एवं लेखा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। वही एसडीएम द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि सरपंच के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1)(क) के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी कर आरोपपत्र की तामील पहले ही कराई जा चुकी है। प्रशासन का मानना है कि यदि सरपंच पद पर बनी रहती हैं तो पंचायत के कार्य, अभिलेख तथा निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 39(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए एसडीएम ने हेमलता बघेल को तत्काल प्रभाव से सरपंच पद से निलंबित कर दिया है।निलंबन अवधि के दौरान उन्हें ग्राम पंचायत के किसी भी शासकीय कार्य का संचालन करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही पंचायत के सभी अभिलेख, शासकीय प्रभार एवं सामग्री संबंधित अधिकृत अधिकारी को तत्काल सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई को पंचायतों में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई एवं अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
















