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शासन के आदेश को ठेंगा! चार जिलों में खुलेआम चलता रहा अटैचमेंट का खेल, डीईओ पर गिरी कार्रवाई की गाज”

शासन के आदेश को ठेंगा! चार जिलों में खुलेआम चलता रहा अटैचमेंट का खेल, डीईओ पर गिरी कार्रवाई की गाज”

संलग्नीकरण खत्म करने के सरकारी आदेश के बाद भी जारी रही मनमानी, लोक शिक्षण संचालनालय ने रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और जांजगीर-चांपा के डीईओ से मांगा जवाब

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रायपुर, 31 मई 2026। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर जिला स्तर पर अटैचमेंट और कार्यालयीन संलग्नीकरण का खेल जारी रहने का बड़ा खुलासा हुआ है। शासन द्वारा जून 2025 में सभी प्रकार के संलग्नीकरण समाप्त करने के आदेश के बावजूद कई जिलों में नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों, प्राचार्यों और व्याख्याताओं को इधर-उधर पदस्थ किया जाता रहा। मामला सामने आने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सख्त रुख अपनाते हुए चार जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

 

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सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से संलग्नीकरण व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इसके बावजूद रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और जांजगीर-चांपा जिलों में पुराने ढर्रे पर अटैचमेंट का खेल चलता रहा।

 

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रायपुर जिले में एक पीएम श्री विद्यालय के प्राचार्य को नियमों के विपरीत स्कूल से हटाकर समग्र शिक्षा कार्यालय में सहायक जिला परियोजना अधिकारी का कार्य सौंप दिया गया। जबकि विभागीय नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि पीएम श्री और आत्मानंद विद्यालयों के कर्मचारियों की संबद्धता का अधिकार केवल राज्य शासन के पास है। ऐसे में जिला स्तर पर जारी आदेशों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

धमतरी जिले में भी एक प्राचार्य को पदस्थापना के कुछ ही समय बाद कार्यमुक्त कर रायपुर स्थित समग्र शिक्षा कार्यालय भेजे जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि यह पूरा मामला उस समय हुआ जब शासन पहले ही संलग्नीकरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका था।

बलौदाबाजार जिले में तो स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। यहां बड़ी संख्या में शिक्षकों और व्याख्याताओं को उनके मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर अन्य विकासखंडों और कार्यालयों में संबद्ध किए जाने की शिकायत विभाग तक पहुंची है। आरोप है कि प्रशासनिक आवश्यकता का हवाला देकर दर्जनों शिक्षकों को इधर-उधर भेजा गया, जिससे कई स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

वहीं जांजगीर-चांपा जिले में एक शिक्षक को विकासखंड शिक्षा कार्यालय में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी जैसे राजपत्रित पद का प्रभार सौंपे जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने चारों जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी और जिला स्तर पर चल रही मनमानी को उजागर कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त कर दी थी, तब आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चलता रहा? विभागीय जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। शिक्षा जगत की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित रह जाता है।

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