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“रिजल्ट लेट, जिम्मेदार सेट? जीपीएम शिक्षा विभाग में अंदरखाने समझौते की चर्चा तेज, नोटिस सिर्फ मीडिया बयानबाजी तक सीमित!”

“रिजल्ट लेट, जिम्मेदार सेट? जीपीएम शिक्षा विभाग में अंदरखाने समझौते की चर्चा तेज, नोटिस सिर्फ मीडिया बयानबाजी तक सीमित!”

“पहले चेतावनी, अब चुप्पी! जीपीएम में 5वीं-8वीं रिजल्ट लेट होने पर कार्रवाई अब तक शून्य”

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अन्य जिलों में समय पर परिणाम जारी हो गया था, जीपीएम में दूसरे दिन जारी हुआ रिजल्ट; शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल…!

पूर्व में लगे समाचार, स्क्रीन शॉट , व वर्जन डीईओ रजनीश तिवारी,

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में जहां तय तिथि पर समय रहते रिजल्ट घोषित कर दिए गए, वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में परिणाम समय तिथि के दूसरे दिन जारी हो पाया। इस देरी ने छात्रों, पालकों और शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी। गई थी 

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सबसे बड़ा सवाल जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। रिजल्ट में देरी के बाद डीईओ द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी करने और कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। न कोई नोटिस सार्वजनिक हुआ, न किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई और न ही विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आई।

अब जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या डीईओ की सख्ती सिर्फ मीडिया और बयानों तक सीमित थी? क्या विभागीय अधिकारियों को बचाने के लिए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?

सूत्रों के अनुसार रिजल्ट तैयार करने, डेटा अपडेट करने और विभागीय समन्वय में गंभीर लापरवाही हुई। विकासखंड स्तर पर काम की धीमी गति और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण हजारों विद्यार्थियों का परिणाम समय पर जारी नहीं हो सका। लेकिन इसके बावजूद किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

विभागीय सूत्रों का दावा है कि नोटिस जारी करने की बात केवल औपचारिक बयान बनकर रह गई। अंदरखाने आपसी तालमेल और समझौते के जरिए मामले को शांत करने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ बयानबाजी ही दिखाई दे रही है।

पालकों का कहना है कि जब प्रदेश के अन्य जिलों में समय पर रिजल्ट जारी हो सकता है, तो आखिर जीपीएम जिला क्यों पिछड़ गया? विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा रहा, लेकिन विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे को बचाने में लगे दिखाई दिए।

जिले में यह चर्चा भी तेज है कि जिला शिक्षा अधिकारी केवल सख्त बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को संरक्षण दिया जा रहा है। यदि विभाग वास्तव में गंभीर होता, तो अब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी होती।

शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र और पालक अब जानना चाहते हैं कि आखिर रिजल्ट में देरी का वास्तविक जिम्मेदार कौन है? और यदि लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

अब सबकी नजर शिक्षा विभाग पर टिकी है। देखना यह होगा कि विभाग वास्तव में कोई कठोर कदम उठाता है या फिर “नोटिस”, “जांच” और “कार्रवाई” जैसे शब्द केवल फाइलों और बयानों तक ही सीमित रह जाती है।

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