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3 करोड़ 1 लाख के टेंडर में बड़ा खेल? फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से ठेका, ईई बीएल सिहसरे की भूमिका पर , सस्पेंस

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- में 3.01 करोड़ का टेंडर घोटाला: सवालों से भागते ईई, मिलीभगत की आशंका तेज

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जिला पंचायत के 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये के निर्माण कार्य से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में अब अधिकारियों की भूमिका भी कठघरे में नजर आ रही है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग मरवाही के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीएल सिहास्त्रे आज मीडिया के सीधे सवालों से बचते दिखाई दिए।

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पहले कहा – “कार्यालय में नहीं हूँ”, फिर ऑफिस में ही मिले

मीडिया द्वारा फोन पर संपर्क किए जाने पर ईई सिहास्त्रे ने कथित तौर पर कहा कि वे कार्यालय में मौजूद नहीं हैं। लेकिन जब मीडिया टीम उनके कार्यालय पहुँची, तो वे वहीं मौजूद पाए गए।

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कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद पहले अनुपस्थित होने की बात कहना और फिर तत्काल बयान देने से इनकार करना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या यह महज संयोग है, या फिर सच से बचने की कोशिश?

फर्जी दस्तावेज लगाकर करोड़ों का टेंडर ?

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मामले में श्री जी कंस्ट्रक्शन ने ठेकेदार हितेश सूर्यवानी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और पूर्णता प्रमाण पत्र लगाकर टेंडर प्राप्त किया।

आरोप यह भी है कि जिस कार्य का वास्तविक अनुभव प्रमाण पत्र शिकायतकर्ता फर्म ने प्रस्तुत किया, उसी का कथित फर्जी संस्करण दूसरे ठेकेदार द्वारा लगाया गया — और उसी के आधार पर पात्रता मिल गई। यदि यह सच है, तो यह सिर्फ फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि पूरी टेंडर प्रणाली पर सीधा हमला है।

जांच समिति पर भी सवालों की बौछार

निविदा के बाद दस्तावेजों की जांच समिति द्वारा निरीक्षण किया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब दो फर्मों ने समान कार्य से जुड़े प्रमाण पत्र लगाए, तो जांच के दौरान संदेह क्यों नहीं हुआ?

क्या दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की गई?
या फिर मोटी रकम के दम पर आंखें मूंद ली गईं?

क्या ऊपर तक है खेल?

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में लाखों रुपये के लेन-देन की चर्चा है और ईई की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लेकिन जिस तरह से मीडिया के सवालों से बचने की कोशिश की गई, उसने संदेह को और गहरा कर दिया है।

अब जांच ही खोलेगी राज…!

यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह सिर्फ एक टेंडर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश मानी जाएगी। ऐसे में दोषी ठेकेदार ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

फिलहाल सबकी नजर शाम 5 बजे संभावित बयान पर टिकी है। सवाल यह है —
क्या सच सामने आएगा, या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?

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