
20 लाख की सड़क 2 महीने में ढही! भ्रष्टाचार की परतें उधड़ीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—“जांच नहीं, तो आंदोलन तय”

निर्माण के हफ्ते भर में उखड़ी सीसी रोड, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
कोरबा-पाली।जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन में भ्रष्टाचार की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जहाँ 20 लाख रुपये की लागत से बनी सीसी रोड महज 2 महीने में ही दम तोड़ चुकी है। यह सड़क दिसंबर-जनवरी के बीच मुख्यमार्ग फारेस्ट काष्टागार से बस्ती तक करीब 600 मीटर लंबाई में बनाई गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद इसकी असलियत खुलकर सामने आ गई।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के हफ्ते भर बाद ही सीमेंट उखड़ने लगा और अब हालात यह हैं कि पूरी सड़क जगह-जगह से टूटकर गिट्टियों में तब्दील हो चुकी है। सड़क पर फैली गिट्टियां और उखड़ी परतें साफ संकेत दे रही हैं कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण के दौरान बुनियादी तकनीकी मानकों का भी पालन नहीं किया गया। जमीन पर पॉलिथीन शीट बिछाने जैसे जरूरी कार्य को नजरअंदाज कर सीधे कंक्रीट डाल दिया गया, जिससे सड़क की मजबूती शुरुआत से ही संदिग्ध हो गई। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस निर्माण का मूल्यांकन और सत्यापन किन मानकों पर किया गया?

ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि जिला खनिज न्यास मद से हुए इस निर्माण में सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर जमकर भ्रष्टाचार किया है। इतना ही नहीं, जनपद पंचायत स्तर के अधिकारियों पर भी सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने निर्माण के दौरान ही घटिया कार्य का विरोध किया था और शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया गया।
अब हालात यह हैं कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़क पूरी तरह बदहाल हो चुकी है और जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई है, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों की मांग साफ है—
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सरकारी राशि की वसूली की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह की मनमानी और भ्रष्टाचार दोबारा न हो।
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस खुली लूट पर कब तक चुप्पी साधे रहता है।















