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“भुइयां पोर्टल में खेल, कोर्ट आदेश की धज्जियां और आदिवासी जमीन पर डाका!” जशपुर में भ्रष्ट पटवारी पर प्रशासन का सबसे बड़ा प्रहार, फर्जीवाड़े के आरोप साबित होते ही सेवा से बर्खास्त

भुइयां पोर्टल में खेल, कोर्ट आदेश की धज्जियां और आदिवासी जमीन पर डाका !”

जशपुर में भ्रष्ट पटवारी पर प्रशासन का सबसे बड़ा प्रहार, फर्जीवाड़े के आरोप साबित होते ही सेवा से बर्खास्त

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जशपुर। जिले के फरसाबहार में प्रशासन ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और सरकारी सिस्टम से छेड़छाड़ के एक सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पटवारी मदन राम भगत को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पटवारी ने डाटा एंट्री ऑपरेटर के साथ मिलकर न केवल ‘भुइयां पोर्टल’ में भारी फर्जीवाड़ा किया, बल्कि न्यायालयीन आदेशों की भी खुली अवहेलना की। मामले को आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला माना जा रहा है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) फरसाबहार द्वारा 15 मई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि पटवारी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप जांच में पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। प्रशासन ने इसे लोकहित के खिलाफ गंभीर कदाचार मानते हुए कड़ी कार्रवाई की।

तहसीलदार की आईडी का दुरुपयोग, सिस्टम से की गई धोखाधड़ी
जांच में सामने आया कि पटवारी मदन राम भगत ने डाटा एंट्री ऑपरेटर मनोज लकड़ा के साथ मिलकर तहसीलदार की ‘भुइयां’ आईडी का गलत इस्तेमाल किया। दोनों को यह जानकारी थी कि “पूर्व में आदेश पारित” विकल्प का उपयोग करने पर ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर रिकॉर्ड में अवैध बदलाव किए गए।
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि “आपत्ति प्राप्त नहीं” और “पूर्व में आदेश पारित” जैसे विकल्पों का दुरुपयोग करते हुए 2 अगस्त 2024 को रिकॉर्ड को कथित रूप से गलत तरीके से दुरुस्त किया गया। इसे सरकारी पोर्टल के साथ सुनियोजित छेड़छाड़ और सिस्टम फ्रॉड माना गया।

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आदिवासी जमीन मामले में गैर-आदिवासी को लाभ पहुंचाने का आरोप
पटवारी पर आरोप है कि उसने आदिवासी पक्षकारों को नुकसान पहुंचाने और गैर-आदिवासी पक्षकार सुरेश यादव को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से कार्रवाई की। बिना विधिवत फौती नामांतरण आदेश के तेजराम और बोधराम के वारिसानों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया।
मामले को और गंभीर तब माना गया जब यह सामने आया कि न्यायालय में पूर्व रजिस्ट्री निरस्त हुए बिना ही नामांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। प्रशासन ने इसे न्यायालयीन आदेशों की प्रत्यक्ष अवहेलना माना है।
तहसीलदार ने खारिज किया, फिर भी दोबारा कर दिया नामांतरण
जांच रिपोर्ट के अनुसार तहसीलदार पत्थलगांव ने 2 जुलाई 2024 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि नामांतरण की आवश्यकता नहीं है। लेकिन इसके बावजूद आरोपी पटवारी ने 8 जुलाई 2024 को दोबारा फौती नामांतरण दर्ज कर दिया। इस कदम को प्रशासन ने आदेशों की खुली अवमानना और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा है।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन, हुई सीधी बर्खास्तगी

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विभागीय जांच के दौरान पटवारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन उसका जवाब असंतोषजनक पाया गया। जांच अधिकारियों ने माना कि आरोपी का कृत्य छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली का गंभीर उल्लंघन है और इससे शासन की साख तथा आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।
कलेक्टर की संस्तुति के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी मदन राम भगत को तत्काल प्रभाव से सेवा से विमुक्त यानी बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही उसे सभी सरकारी दस्तावेज, अभिलेख और कार्यालयीन संपत्ति तत्काल जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का संदेश — भ्रष्टाचार और जमीन फर्जीवाड़े पर अब “जीरो टॉलरेंस”
फरसाबहार की यह कार्रवाई प्रशासन का साफ संदेश मानी जा रही है कि जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी, आदिवासी अधिकारों से छेड़छाड़ और सरकारी पोर्टल के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में इस कार्रवाई के बाद राजस्व अमले में भी हड़कंप मचा हुआ

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