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बोर्ड रिजल्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंता, स्कूल शिक्षा विभाग में जल्द बड़ा फेरबदल संभव

बोर्ड रिजल्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंता, स्कूल शिक्षा विभाग में जल्द बड़ा फेरबदल संभव

कई जिलों में डीईओ पद खाली, अतिरिक्त प्रभार पर चल रहा कामकाज; शिक्षा मंत्री के दिल्ली दौरे से लौटते ही जारी हो सकते हैं आदेश

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रायपुर, 8 मई 2026।छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में जल्द ही बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जबकि कई जिलों में अतिरिक्त प्रभार के भरोसे शिक्षा व्यवस्था संचालित हो रही है। लगातार कमजोर हो रहे बोर्ड परीक्षा परिणाम और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सरकार अब गंभीर नजर आ रही है। यही वजह है कि विभाग स्तर पर बड़े पैमाने पर तबादला और नई पदस्थापनाओं की तैयारी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के प्राथमिकता वाले जिलों की सूची तैयार कर ली है, जहां जल्द नए डीईओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। बताया जा रहा है कि कई अधिकारियों के प्रदर्शन, विभागीय अनुशासन, शैक्षणिक परिणाम और प्रशासनिक क्षमता को आधार बनाकर समीक्षा की गई है। अब शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दिल्ली दौरे से लौटने के बाद अंतिम सहमति बनते ही आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

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अतिरिक्त प्रभार से प्रभावित हो रही शिक्षा व्यवस्था

प्रदेश के कई जिलों में नियमित डीईओ की नियुक्ति नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई अधिकारी दो-दो जिलों का प्रभार संभाल रहे हैं, जिससे स्कूल निरीक्षण, शिक्षकों की मॉनिटरिंग, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। विभागीय बैठकों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।

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जानकारों का कहना है कि शिक्षा विभाग अब सिर्फ औपचारिक नियुक्तियां नहीं करना चाहता, बल्कि पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे अधिकारियों को प्राथमिकता दी जा सकती है जिनका रिकॉर्ड बेहतर रहा हो और जिन्होंने अपने जिलों में शैक्षणिक सुधार के ठोस परिणाम दिए हों।

बोर्ड परीक्षा परिणाम बना बड़ा कारण

इस वर्ष 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों ने सरकार और शिक्षा विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में परीक्षा परिणाम उम्मीद से काफी कमजोर रहे हैं। कुछ जिलों में पास प्रतिशत 50 से 70 प्रतिशत के बीच ही सीमित रहा, जिसे विभाग ने गंभीरता से लिया है। लगातार गिरते परिणामों के पीछे शिक्षकों की कमी, निरीक्षण व्यवस्था की कमजोरी, अकादमिक मॉनिटरिंग की कमी और प्रशासनिक लापरवाही जैसे कारणों को जिम्मेदार माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार विभाग ने ऐसे जिलों की अलग से समीक्षा शुरू कर दी है जहां पिछले कुछ वर्षों से परिणाम लगातार खराब आ रहे हैं। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और यह भी देखा जा रहा है कि जिला स्तर पर सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए थे। जिन जिलों में स्थिति ज्यादा खराब पाई गई है, वहां प्रशासनिक बदलाव लगभग तय माना जा रहा है।

इन जिलों पर सबसे ज्यादा नजर

जानकारी के मुताबिक रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बालोद, जांजगीर-चांपा, सक्ती और कवर्धा समेत कई जिलों के परिणाम विभाग की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे। ऐसे जिलों में नए अधिकारियों की नियुक्ति की संभावना अधिक मानी जा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य जिलों में भी अतिरिक्त प्रभार और कमजोर मॉनिटरिंग को लेकर सरकार असंतुष्ट बताई जा रही है।

विभागीय सूत्रों का दावा है कि इस बार तबादला सूची केवल सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की रणनीति का हिस्सा होगी। सरकार चाहती है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र में स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग, शिक्षकों की जवाबदेही और छात्रों के प्रदर्शन में सुधार दिखाई दे।

बड़े स्तर पर पुनर्गठन की तैयारी

सूत्र यह भी बताते हैं कि विभाग केवल डीईओ स्तर तक ही सीमित नहीं रहेगा। ब्लॉक और जिला स्तर के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों की भी समीक्षा की जा रही है। जरूरत पड़ने पर सहायक संचालक, बीईओ और अन्य अधिकारियों के प्रभार में भी बदलाव किया जा सकता है।

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