
जंगल की कटाई पर वन विभाग की गश्ती व्यवस्था कटघरे में! साढामार बंध के पास पेड़ों की कथित कटाई से हड़कंप, जिम्मेदारों को भनक तक नहीं?
चंद्रौटी बीट में गुंजा, सलेहा और सरई-साल के पेड़ों की कटाई का आरोप, खाम्हरिया में सागौन कटाई के पुराने मामले ने भी उठाए सवाल
पसान। कटघोरा वनमंडल के पसान वनपरिक्षेत्र अंतर्गत लैंगा सर्किल के चंद्रौटी बीट में सढामार बंध के पास बड़े पैमाने पर गुंजा, सलेहा और सरई-साल के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की गश्ती और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। जंगल के भीतर लगातार पेड़ों की कटाई के आरोप सामने आने के बावजूद जिम्मेदार वन अमले को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई, यह सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि सढामार बंध के आसपास जंगल में कई पेड़ों की कथित कटाई की गई है। यदि मौके पर पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि कटाई कब हुई, कितने पेड़ काटे गए, लकड़ी कहां ले जाई गई और संबंधित क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

खाम्हरिया में सागौन कटाई के बाद भी नहीं चेता विभाग?
यह पहला मामला नहीं है, जब पसान वनपरिक्षेत्र में जंगल की कटाई को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले खाम्हरिया के पास सागौन के इमारती पेड़ों की बड़े पैमाने पर कथित कटाई का मामला सामने आने की बात कही गई थी। उस मामले में भी ड्यूटी पर तैनात रेंजर और बीट गार्ड द्वारा जानकारी नहीं होने की बात सामने आई थी। अब सवाल और गंभीर हो गया है—अगर वन क्षेत्र में तैनात अमला ही अपने बीट में हो रही कथित कटाई से अनजान है, तो नियमित गश्त आखिर किस बात की हो रही है?

वन विभाग का मैदानी अमला जंगल की सुरक्षा, अवैध कटाई पर नजर रखने और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में बार-बार कटाई के आरोप सामने आना और जिम्मेदारों की ओर से जानकारी नहीं होने की बात सामने आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
जानकारी सामने लाने वाला ही निशाने पर?
इस पूरे मामले का एक और पहलू स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि राय सिंह द्वारा कथित कटाई की जानकारी मीडिया तक पहुंचाई गई। आरोप है कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई का केंद्र कथित कटाई और उसकी जांच के बजाय जानकारी देने वाले व्यक्ति की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि यह आरोप सही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि जंगल में कथित कटाई की सूचना सामने लाने वाले व्यक्ति की भूमिका तलाशना प्राथमिकता है या पहले मौके का सत्यापन कर पेड़ों की कटाई की वास्तविकता सामने लाना?
कटाई हुई तो जिम्मेदारी किसकी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सढामार बंध और खाम्हरिया क्षेत्र में पेड़ों की कथित कटाई की पुष्टि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित बीट में नियमित गश्त हुई थी? गश्ती रजिस्टर में क्या दर्ज है? मौके का निरीक्षण कब-कब किया गया? क्या कटे हुए पेड़ों की संख्या और प्रजाति का पंचनामा बनाया गया? लकड़ी के परिवहन की कोई जानकारी विभाग के पास है या नहीं?
इन सवालों का जवाब विभागीय जांच से ही सामने आ सकता है।अब उच्च अधिकारियों की निगरानी पर टिकी नजर
स्थानीय लोगों और मामले से जुड़े लोगों की मांग है कि चंद्रौटी बीट के सढामार बंध तथा खाम्हरिया क्षेत्र में स्वतंत्र टीम से मौके का निरीक्षण, कटे हुए पेड़ों की गणना, पुराने ठूंठों की जांच, गश्ती अभिलेखों का परीक्षण और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब देखना होगा कि वन विभाग कथित कटाई के मामले में मौके पर कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करता है या मामला जांच और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जंगल की रखवाली के लिए जिम्मेदार अमला तैनात है, तो जंगल में पेड़ों की कथित कटाई आखिर किसकी नजरों के सामने होती रही? और अगर किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी, तो फिर जंगल की निगरानी व्यवस्था आखिर किसके भरोसे है।




















