LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: 4 दिनों से बंद पड़ा स्कूल, रसोईया संभाल रही बच्चों की जिम्मेदारी कोटा विकासखंड के सुदूर आदिवासी गांव मुसियारी का मामला, शिक्षक नदारद

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: 4 दिनों से बंद पड़ा स्कूल, रसोईया संभाल रही बच्चों की जिम्मेदारी

कोटा विकासखंड के सुदूर आदिवासी गांव मुसियारी का मामला, शिक्षक नदारद

ये खबर भी पढ़ें…
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी
June 23, 2026
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी गौरेला पेंड्रा मरवाही, 23 जून 2026/अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं और प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी इन दावों की पोल खोल रही है। सरकारी स्कूलों की पुरानी कार्यशैली और कुछ शिक्षकों की मनमानी के चलते ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।

अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर पालक चिंतित हैं, वहीं जिम्मेदार शिक्षक और अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत टांटीधार के आश्रित ग्राम मुसियारी का है, जहां प्राथमिक शाला में पिछले चार दिनों से शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं और बच्चों को पढ़ाने की जगह केवल मध्यान्ह भोजन खिलाकर घर भेजा जा रहा है।

ये खबर भी पढ़ें…
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर
June 23, 2026
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

घने जंगल के बीच बसा नेटवर्क विहीन आदिवासी गांव..!

ब्लॉक मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर, घने जंगलों के बीच बसा यह गांव बैगा आदिवासी समुदाय का है। नेटवर्क विहीन होने के कारण यह गांव विकास की मुख्यधारा से आज भी कटा हुआ है। शायद यही वजह है कि सरकारी योजनाओं और अधिकारियों की निगरानी यहां तक नहीं पहुंच पाती। जब नवभारत रिपोर्टर ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया, तो जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

ये खबर भी पढ़ें…
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी
June 23, 2026
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी रायपुर, 23...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

25 घरों के गांव में बंद पड़ी पढ़ाई..!

करीब 25 घरों वाले इस गांव में बैगा और सौता परिवार निवास करते हैं। यहां स्थित संकुल केंद्र आमागोहन अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मुसियारी में कुल दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन दोनों ही शिक्षक पिछले चार दिनों से स्कूल से नदारद हैं। स्कूल का ताला 6 फरवरी से रसोईया फूलमतिया बाई द्वारा खोला जा रहा है। वे बच्चों को मध्यान्ह भोजन खिलाकर स्कूल बंद कर देती हैं। पढ़ाई पूरी तरह ठप है।

शिक्षकों ने रसोईया को थमाई स्कूल की चाबी…!

ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल में पदस्थ शिक्षक गोपाल सिंह और कुमारी तीजन लास्कर अंतिम बार 5 फरवरी को स्कूल आए थे। इसके बाद उन्होंने स्कूल की चाबी रसोईया को सौंप दी और तब से स्कूल नहीं पहुंचे। सोमवार को दोपहर 12 बजे तक भी कोई शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा। उस समय केवल दो बच्चे स्कूल के बाहर बैठे मिले। शिक्षकों की लगातार अनुपस्थिति से नाराज पालकों ने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।

पालकों की चिंता: बच्चों का भविष्य बर्बाद..!

बच्चों के पालकों का कहना है कि शिक्षक नहीं आने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। आदिवासी अंचल के इन बच्चों के लिए यही स्कूल शिक्षा का एकमात्र सहारा है, लेकिन लापरवाही के चलते उनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

संकुल समन्वयक को भी नहीं थी जानकारी….!

जब इस संबंध में संकुल समन्वयक पूर्णानंद मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की जानकारी नहीं है और इस सप्ताह वे स्कूल निरीक्षण पर भी नहीं गए हैं। इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर होती है।

बीईओ ने माना गंभीर मामला, कार्रवाई के निर्देश

मामले पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कोटा नरेंद्र मिश्रा ने कहा—

“शिक्षकों का स्कूल नहीं आना एक गंभीर मामला है। दोनों शिक्षकों को नोटिस जारी किया जा रहा है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”लेकिन यह नोटिस औपचारिकता है ऐसे कई मामलों में उनके द्वारा कार्यवाही नहीं किया गया है….? 

बड़ा सवाल……..?

जब दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में शिक्षा की सबसे अधिक जरूरत है, तब ऐसी लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या वास्तव में दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाते हैं।

Back to top button
error: Content is protected !!