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पशु चिकित्सको की कमी से जूझ रहे जिले के पशु अस्पताल, डॉ पशु चिकित्सक को दे रहे जनपद पंचायत की प्रभार; राकेश जालान नगर पालिका अध्यक्ष..देखें बयान

  • गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में पशुपालन विभाग न सिर्फ संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, बल्कि स्टॉफ की कमी भी हैं और समय पर बीमार और बेजान पशुओं के इलाज में आड़े आ रही है। नतीजा निजी चिकित्सकों के भरोसे बैठे पशुपालकों को अपना पशुधन सुरक्षित रखने को महंगा खर्च उठाना पड़ रहा है। जिला प्रशासन को पूरी जानकारी के बाद भी जिम्मेदार आला आफसर समस्या के समाधान की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि जिले की तीन ब्लॉक मे पूरी आदिवासी बहुल्य क्षेत्र हैं जहाँ अधिक किसान हैं जिनके पास पशु व बकरी की पालान करते हैं और अभी बरसात के दिन मे पशु अधिकतर बीमार पड़ रहे हैं लाखो की तादात मे पशुओं पाले जाते हैं। खेती-बाड़ी के साथ-साथ दुग्ध व्यवसाय यहां किसानों की आमदनी का प्रमुख माध्यम है। वहीं, पशु चिकित्सक और स्टाफ की कमी के चलते जिले में पशु चिकित्सा सेवा राम भरोसे चल रही है। हाल तब है,जबकि जिले में आस पास अन्य जिलों के मुकाबले बीमारू पशुओं की दर सबसे अधिक है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले मे एक जिम्मेदार अधिकारी को पंचायत की कार्यभार सैपा गया हैं जब की छत्तीसगढ़ शासन रायपुर मंत्रालय द्वारा आदेश अनुसार एक पशु चिकित्सक को जनपद पंचायत CEO का प्रभार नहीं दिया जाए ड्यूटी कलेक्टर की रेंज की अधिकारी को CEO बनाया जाए। फिलहाल, जिले की बदहाल व्यवस्था के बीच निजी पशु चिकित्सकों के भरोसे बैठे पशुपालकों को अपने बीमार पशुधन की हिफाजत को महंगा खर्च उठाना पड़ रहा हैं।

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