
27 लाख का नुकसान, नियमों की अनदेखी उजागर… फिर भी कार्रवाई लंबित, क्या सिस्टम खुद बचा रहा दोषियों को?
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही।जनपद पंचायत पेंड्रा अंतर्गत ग्राम पंचायत कुडकई में सामने आए करीब 27 लाख रुपये के राजस्व नुकसान के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। जांच पूरी होने और दोषियों की पहचान हो जाने के बावजूद मामला अभी भी “प्रस्तावित कार्रवाई” तक सीमित है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त शिकायत के आधार पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में पशु पंजीयन बाजार का ठेका नहीं कराया गया। इस लापरवाही के चलते पंचायत को लगभग 27 लाख रुपये की राजस्व हानि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि ठेका प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण अब बकाया राशि की वसूली भी संभव नहीं है।


जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत सचिव संतराम यादव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। वहीं सरपंच जगेश्वरी बाई के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई है।इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

यह पूरा प्रकरण जिला पंचायत सीईओ गौरेला–पेंड्रा–मरवाही को कई महीने पहले भेजा जा चुका है, लेकिन फाइल अब तक लंबित है। न तो निलंबन आदेश जारी हुआ और न ही किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई सामने आई है।
कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और दोष स्पष्ट हैं, तो कार्रवाई में इतनी देरी समझ से परे है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं फाइलों को जानबूझकर रोका तो नहीं जा रहा।
जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में नोटिस, जवाब और सुनवाई जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिसके बाद ही सक्षम अधिकारी कार्रवाई करता है। हालांकि, इतने लंबे समय तक मामला लंबित रहना प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल जरूर खड़े करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि 27 लाख रुपये के नुकसान के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?















