कागज़ों में चल रहे काल्पनिक स्कूल का पर्दाफाश: साल 2020 से 2024 तक RTE प्रतिपूर्ति का 22.52 लाख निकालने वाले दंपती को पुलिस ने किया गिरफ्तार, शिक्षा विभाग खुद हुआ हैरान

कागज़ों में चल रहे काल्पनिक स्कूल का पर्दाफाश:
साल 2020 से 2024 तक RTE प्रतिपूर्ति का 22.52 लाख निकालने वाले दंपती को पुलिस ने किया गिरफ्तार, शिक्षा विभाग खुद हुआ हैरान
रायगढ़। जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रतिपूर्ति राशि हड़पने के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। ग्राम अड़भार (जिला सक्ती) निवासी घनश्याम टंडन और उसकी पत्नी शांति टंडन को चार वर्षों से फर्जी स्कूल संचालन दिखाकर लाखों की सरकारी राशि गबन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
फर्जी स्कूल का पर्दाफाश !
खरसिया के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड–02 खिलावन बंजारे ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, दंपती ने ग्राम बड़े देवगांव में “मदर इंडिया कॉन्वेंट स्कूल बड़े देवगांव” नाम से एक अशासकीय विद्यालय संचालित होने का दावा किया था।
जांच के दौरान शिक्षा विभाग ने पाया कि गांव में ऐसा कोई स्कूल अस्तित्व में ही नहीं है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक दंपती ने स्वयं को स्कूल का संचालक और प्रधान पाठक बताते हुए फर्जी प्रवेश और उपस्थिति पंजियों का निर्माण किया था। कई सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के नाम को अपने कथित विद्यालय में दर्ज दिखाया गया था।
फर्जी प्रविष्टियों के आधार पर राशि आहरित !
आरोपियों ने इन फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर RTE के तहत मिलने वाली शुल्क एवं गणवेश प्रतिपूर्ति की कुल ₹22,52,281 की राशि शासन से प्राप्त कर ली।
जिला शिक्षा अधिकारी, रायगढ़ ने आरोपियों को शासन की राशि वापस जमा करने का नोटिस भी जारी किया था, लेकिन दंपती ने रकम वापस नहीं की। इसके बाद शिक्षा विभाग ने पुलिस में शिकायत की।
त्वरित कार्रवाई में दंपती गिरफ्तार !
शिकायत प्राप्त होते ही खरसिया पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच पूरी कर BNS की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। दोनों आरोपियों—घनश्याम टंडन और शांति टंडन—को हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस व शिक्षा विभाग सतर्क !
पुलिस का कहना है कि यह चार वर्षों तक चल रहा संगठित फर्जीवाड़ा था, जिसमें सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर लाखों की राशि निकाली गई। आगे अन्य दस्तावेज़ों, खातों और संभावित सहयोगियों की जांच भी जारी है।
यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सत्यापन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस व विभागीय अधिकारी अब जिले के अन्य निजी विद्यालयों की भी जांच कराने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ों पर रोक लगाई जा सके।





