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प्राचार्य की लापरवाही या मनमानी?”शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल! स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश नहीं देने के आरोप..?स्कूल में अब भी पुराने जिले का रिकॉर्ड”

प्राचार्य की लापरवाही या मनमानी?”शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल! ,स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश नहीं देने के आरोप..? स्कूल में अब भी पुराने जिले का रिकॉर्ड”

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय धनौली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम की 9वीं और 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने पहुंचे विद्यार्थियों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि प्रवेश नहीं लिया जाएगा। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह सरकार की उस मंशा के विपरीत है जिसके तहत ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्वामी आत्मानंद विद्यालय शुरू किए गए हैं।

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मामला यहीं तक सीमित नहीं है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बने पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्यालय परिसर की दीवारों पर आज भी बिलासपुर कलेक्टर और बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी का नाम अंकित है। इससे विद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और प्राचार्य राम गोपाल साहू की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर प्रदेश के शिक्षा मंत्री शिक्षा व्यवस्था में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और आधुनिक स्कूलों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धनौली विद्यालय की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती दिखाई दे रही है। आखिर विद्यालय प्रशासन इतने वर्षों में अपने सूचना बोर्ड तक अपडेट क्यों नहीं कर पाया? क्या बच्चों को आज भी पुराने जिले के अधिकारियों के नाम पढ़ाना ही शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गया है?

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विद्यालय के सूचना बोर्ड तक समय पर नहीं बदले जा सके और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो विद्यालय की व्यवस्थाओं की गंभीर समीक्षा आवश्यक है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से शासन की छवि भी प्रभावित होती है और विद्यार्थियों व अभिभावकों का भरोसा कमजोर पड़ता है।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा…? क्या अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश से जुड़े आरोपों की सत्यता सामने लाई जाएगी…?

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