
“कागजों में मजबूत, जमीन पर ध्वस्त—420 करोड़ खर्च के बावजूद सड़कें चंद दिनों में उखड़ी, क्या है अंदरुनी सिस्टम
पीएम जनमन योजना के तहत बन रही 31 सड़कों पर गंभीर सवाल, निगरानी नदारद; ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और कार्रवाई की उठाई मांग

बेलगहना–कोटा-बिलासपुर_प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बन रही सड़क बेलगहना–कोटा क्षेत्र में करीब 420 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 31 सड़कों की गुणवत्ता पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर सड़कें बनते ही उखड़ने लगी हैं। हालात ऐसे हैं कि डामर की परत को हाथ से छूते ही वह बिखर जा रही है, जिससे पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी लापरवाही बरती जा रही है। गिट्टी की मात्रा कम रखी जा रही है और डस्ट (मिट्टी) अधिक मिलाई जा रही है, जिससे सड़क की मजबूती खत्म हो रही है। डामरीकरण से पहले सड़क की सतह को ठीक से तैयार नहीं किया गया, न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा गया। इसके बावजूद जल्दबाजी में ठंडा डामर बिछा दिया गया, जो टिक नहीं पा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई स्थानों पर सड़क बनने के महज कुछ ही दिनों के भीतर गड्ढे उभर आए हैं। बारिश या हल्की आवाजाही के बाद ही सड़क की परत उखड़ने लगती है। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि आम जनता की जान भी जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें बनने के बजाय “नाम मात्र की खानापूर्ति” की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े बजट के बावजूद निगरानी तंत्र आखिर कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर न तो कोई इंजीनियर दिखाई देता है और न ही अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। ठेकेदार मनमर्जी से काम कर रहे हैं और गुणवत्ता मानकों को खुली चुनौती दे रहे हैं। शिकायत करने पर भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं या टालमटोल जवाब दे रहे हैं।

मौके पर मौजूद लोगों ने सड़क की खराब गुणवत्ता के वीडियो और फोटो भी बनाए हैं, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सड़क की परत हाथ से ही उखड़ रही है, जिससे निर्माण कार्य की सच्चाई उजागर हो रही है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क निर्माण में तय तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। डामर बिछाने से पहले बेस लेयर को मजबूत बनाना जरूरी होता है, लेकिन यहां नींव ही कमजोर नजर आ रही है। सही मिश्रण अनुपात और तापमान का भी पालन नहीं किया गया, जिससे सड़क की पकड़ कमजोर हो गई है और वह जल्दी खराब हो रही है।
जनप्रतिनिधि का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि “करोड़ों के भ्रष्टाचार” का मामला प्रतीत होता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, खराब सड़कों का पुनर्निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या करोड़ों रुपये की इस परियोजना में हुई कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा—यह आने वाला समय बताएगा।















