LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

विपणन विभाग की घोर लापरवाही उजागर, 20 हजार क्विंटल धान सड़ा, शासन को 6 करोड़ से अधिक का नुकसान

विपणन विभाग की घोर लापरवाही उजागर, 20 हजार क्विंटल धान सड़ा, शासन को 6 करोड़ से अधिक का नुकसान !

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही।छत्तीसगढ़ के गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में विपणन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां विगत खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया लगभग 20,000 क्विंटल धान सड़कर बर्बाद हो गया, जिससे शासन को 6 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता प्रतीत हो रहा है।

ये खबर भी पढ़ें…
20 लाख की सड़क 2 महीने में ढही! भ्रष्टाचार की परतें उधड़ीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब ?
20 लाख की सड़क 2 महीने में ढही! भ्रष्टाचार की परतें उधड़ीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब ?
April 23, 2026
20 लाख की सड़क 2 महीने में ढही! भ्रष्टाचार की परतें उधड़ीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब? ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—“जांच...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

वीरेन्द्र सिंह बघेल, कांग्रेस प्रवक्ता, जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही

मामले के सामने आते ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही लेने के बजाय सफाई देने में जुटे हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
जीगौरेला पेंड्रा मरवाही_में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे जारी
जीगौरेला पेंड्रा मरवाही_में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे जारी
April 24, 2026
जिले में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

योगेन्द्र सिंह नहरेल, BJP किसान मोर्चा अध्यक्ष, गौरेला पेंड्रा मरवाही।

सवाल यह नहीं है कि धान खराब हुआ या नहीं, सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान आखिर किसकी मिलीभगत से सड़ने दिया गया? खुले आसमान के नीचे “सरकारी धन” की बर्बादी सूत्रों के अनुसार, समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा गया यह धान संग्रहण केंद्रों में महीनों तक पड़ा रहा। समय पर न तो इसका उठाव कराया गया, न ही कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलों को भेजा गया। कई केंद्रों पर धान को खुले मैदान में, बिना पॉलिथीन कवर और वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था के रखा गया।नतीजा यह हुआ कि बारिश, नमी और मौसम के प्रभाव से धान पूरी तरह काला पड़ गया, दाने सड़ गए और उसकी गुणवत्ता इतनी गिर गई कि वह खपत के लायक भी नहीं बचा।
किसानों की मेहनत पर पानी, सिस्टम चैन की नींद में यह वही धान है, जिसे उगाने के लिए किसान ने महीनों मेहनत की, कर्ज लिया, खेतों में पसीना बहाया। लेकिन सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने किसानों की मेहनत को कूड़े में तब्दील कर दिया।किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते परिवहन, तिरपाल-पॉलिथीन कवरिंग और मिलिंग की व्यवस्था कर दी जाती, तो यह नुकसान रोका जा सकता था। सवाल यह भी है कि जब विभाग के पास पूरे स्टाफ, गोदाम और बजट मौजूद था, तो फिर धान को भगवान भरोसे क्यों छोड़ दिया गया?

ये खबर भी पढ़ें…
नोटिस का झुनझुना या भ्रष्टाचार का नया फंडा.? केंदा स्कूल कांड में DEO विजय टांडे की संदिग्ध खामोशी और ‘मंत्रालय’ के नाम पर दोषियों को बचा रहे.?
नोटिस का झुनझुना या भ्रष्टाचार का नया फंडा.? केंदा स्कूल कांड में DEO विजय टांडे की संदिग्ध खामोशी और ‘मंत्रालय’ के नाम पर दोषियों को बचा रहे.?
April 24, 2026
जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर/कोटा : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शिक्षा विभाग ने शायद 'टाइम मशीन' का अविष्कार कर ली...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अधिकारी की सफाई,सवाल बरकरार
जिला विपणन अधिकारी हरीश शर्मा का कहना है !

कि कुल 20 हजार क्विंटल में से करीब 16 हजार क्विंटल धान का डिलीवरी ऑर्डर (DO) कट चुका है और राइस मिलर्स इसे उठाने के लिए तैयार हैं।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब धान पहले ही अमानक हो चुका है,जब वह काला पड़ चुका है,
जब उसकी गुणवत्ता समाप्त हो चुकी है,तो फिर DO काटने का क्या औचित्य रह जाता है? क्या यह नुकसान छिपाने की कोशिश है?

क्या DO काटकर जिम्मेदारी से बचने का रास्ता तलाशा जा रहा है?

क्या यह सिर्फ लापरवाही है या बड़ा खेल? यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धान खराब होने, गायब होने या घटिया भंडारण के मामले सामने आ चुके हैं। हर बार जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है और कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
अब सवाल उठ रहा है—क्या धान खराब होने के पीछे सिर्फ लापरवाही है, या जानबूझकर करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का खेल?
क्या इसमें ठेकेदार, मिलर्स और विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों ने इस मामले में उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच,
जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई,और नुकसान की भरपाई दोषियों से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी इसी तरह किसानों की उपज और सरकारी धन को लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जाता रहेगा।
अब देखना यह है कि शासन इस गंभीर मामले को सिर्फ फाइलों में दबाता है, या फिर वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई कर किसानों और जनता के हितों की रक्षा करता है।क्योंकि यह मामला सिर्फ धान का नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़ांध का है।

Back to top button
error: Content is protected !!