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“कोरबा शिक्षा विभाग बना ‘सेटिंग सेंटर’… तबादला आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे प्रभारी DEO टीपी उपाध्याय!”

“कोरबा शिक्षा विभाग बना ‘सेटिंग सेंटर’… तबादला आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे प्रभारी DEO टीपी उपाध्याय!”

हाईकोर्ट निर्देश और शासन आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्यमुक्ति, कटघोरा में दो-दो ABEO बैठाकर नियमों की उड़ाई धज्जियां

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कोरबा। कोरबा जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर प्रशासनिक अव्यवस्था और मनमानी के आरोपों में घिरता जा रहा है। आरोप है कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय शासन के आदेशों को भी अपनी सुविधा अनुसार चलाने लगे हैं। स्थिति ऐसी बन गई है कि शिक्षा विभाग का प्रशासनिक सिस्टम पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गया है।
मामला कटघोरा विकासखंड का है, जहां सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) अभिमन्यु टेकाम का तबादला शासन द्वारा जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह किया गया था। शासन ने उनके स्थान पर हरिकृष्णा नायक की पदस्थापना भी कर दी और उन्होंने कटघोरा में ज्वाइनिंग भी दे दी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि तबादला आदेश जारी होने, हाईकोर्ट में मामला जाने और वरिष्ठ सचिवों की समिति द्वारा तबादले को सही ठहराए जाने के बाद भी अभिमन्यु टेकाम आज तक कटघोरा में जमे हुए हैं। आरोप है कि प्रभारी डीईओ टी.पी. उपाध्याय ने जानबूझकर कार्यमुक्ति आदेश दबाकर रखा और शासन के निर्देशों का पालन नहीं कराया।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, फिर भी नहीं मानी व्यवस्था
अभिमन्यु टेकाम ने पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ रखने वाली नीति का हवाला देते हुए तबादले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले को वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष भेजा।
समिति ने सुनवाई के बाद स्पष्ट माना कि स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया है और इसमें स्थानांतरण नीति 2005 का उल्लंघन नहीं हुआ। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने भी अभ्यावेदन निरस्त करते हुए तबादले को यथावत रखा।
इसके बावजूद कटघोरा में पुराना अधिकारी भी बना हुआ है और नया अधिकारी भी कामकाज संभालने को मजबूर है। इससे विभागीय व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
“शासन एक तरफ, डीईओ दूसरी तरफ!”

शिक्षा विभाग के अंदरखाने में चर्चा है कि प्रभारी डीईओ टीपी उपाध्याय राजनीतिक संरक्षण के दम पर मनमानी कर रहे हैं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि विभाग में नियम-कायदों से ज्यादा “सेटिंग सिस्टम” चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक विभाग में पदस्थापना, निलंबन-बहाली, प्रमोशन, खरीदी और अन्य प्रशासनिक मामलों में खुलेआम लेनदेन की चर्चा आम हो चुकी है। विभाग के ही एक कथित करीबी शिक्षक पर “मध्यस्थ” बनकर काम कराने के आरोप भी लग रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था चौपट, ‘आवक’ पर ज्यादा फोकस!
कोरबा जिले में शिक्षा गुणवत्ता पहले ही सवालों के घेरे में है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का फोकस स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की बजाय कथित आर्थिक खेल पर ज्यादा होने के आरोप लग रहे हैं।
कटघोरा में दो-दो एबीईओ बैठाने की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि शिक्षा विभाग में प्रशासनिक अनुशासन किस स्तर तक कमजोर हो चुका है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शासन के स्पष्ट आदेश, हाईकोर्ट के निर्देश और वरिष्ठ सचिवों की समिति के निर्णय के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि हुई, तो उसका पालन किसके संरक्षण में रोका गया?

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