LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंट्रेंडिंगदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

करोड़ों के छात्रावास निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, इंजीनियर से लेकर निगरानी व्यवस्था तक सवालों में_____

करोड़ों के छात्रावास निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, इंजीनियर से लेकर निगरानी व्यवस्था तक सवालों में_____

एक इंजीनियर को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, RES मरवाही के SDO को आदिवासी विकास विभाग में SDO का अतिरिक्त प्रभार; निरीक्षण और सत्यापन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल____

ये खबर भी पढ़ें…
गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती पर कृषि महाविद्यालय में विविध आयोजन, स्वयंसेवकों ने दिया स्वच्छता का संदेश
गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती पर कृषि महाविद्यालय में विविध आयोजन, स्वयंसेवकों ने दिया स्वच्छता का संदेश
October 3, 2026
गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती पर कृषि महाविद्यालय में विविध आयोजन, स्वयंसेवकों ने दिया स्वच्छता का संदेश बैकुंठपुर। स्व. डॉ....
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे छात्रावासों के नवीन भवन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी, स्थल निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों का वास्तविक स्थल निरीक्षण और तकनीकी सत्यापन आखिर किस स्तर पर और किस आधार पर किया जा रहा है?

बताया जा रहा है कि एक ही इंजीनियर को पेंड्रा क्षेत्र के साथ-साथ आदिवासी विकास विभाग, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वहीं RES मरवाही के SDO DO श्याम दास मोहले को आदिवासी विकास विभाग में SDO का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इससे विभागीय कार्यों के तकनीकी पर्यवेक्षण और प्रभावी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
मरवाही – अनुपस्थिति दर्ज, फिर भी पूरा वेतन !  लेखापाल की भूमिका पर सवाल; CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत…!
मरवाही – अनुपस्थिति दर्ज, फिर भी पूरा वेतन ! लेखापाल की भूमिका पर सवाल; CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत…!
October 3, 2026
अगस्त 1026  में कई दिन अनुपस्थिति के बावजूद पूरा वेतन...? महावीर टांडिया माध्यमिक शाला पोड़ी के शिक्षक पर आरोप, लेखापाल...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

गलत स्थल चयन के बाद भी सत्यापन पर सवाल !

मामले का सबसे गंभीर पहलू छात्रावास निर्माण के लिए स्थल चयन से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि एक निर्माण स्थल के चयन को लेकर पहले आपत्ति या गलती स्वीकार किए जाने के बावजूद बाद में उसी स्थल को सही ठहराने की प्रक्रिया अपनाई गई। यदि ऐसा हुआ है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्थल चयन की तकनीकी जांच किस अधिकारी ने की और बाद में उसे सही मानने का आधार क्या था?

ये खबर भी पढ़ें…
राज्य स्तरीय बेसबॉल प्रतियोगिता में PM श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल मरवाही का शानदार प्रदर्शन
राज्य स्तरीय बेसबॉल प्रतियोगिता में PM श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल मरवाही का शानदार प्रदर्शन
October 3, 2026
 राज्य स्तरीय बेसबॉल प्रतियोगिता में PM श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल मरवाही का शानदार प्रदर्शन मरवाही। पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

करोड़ों रुपये की लागत वाले भवनों में स्थल चयन, डिजाइन, तकनीकी स्वीकृति, निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता जैसे प्रत्येक चरण में जिम्मेदारी तय होती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर बिना पर्याप्त स्थल निरीक्षण के सत्यापन किए जाने की शिकायत सामने आती है तो उसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक हो जाती है।

बर्खास्त संविदा कर्मचारी को दोबारा जिम्मेदारी कैसे?

मामले में एक और गंभीर सवाल मरवाही जनपद से जुड़े पूर्व संविदा कर्मचारी को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि पूर्व में बर्खास्त किए गए संविदा टीए को बाद में दोबारा कार्य पर लगाए जाने की स्थिति बनी और वह उच्च कार्यालयों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहा।

विभागीय सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि उक्त व्यक्ति को डेलीबेस पर पूर्व कलेक्टर कार्यालय से कार्य दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

यदि कोई कर्मचारी पूर्व में बर्खास्त किया गया था तो उसके पुनः नियोजन की पूरी प्रक्रिया क्या रही? किस अधिकारी ने आदेश जारी किया? किस पद या व्यवस्था के तहत उसे काम दिया गया? और क्या उसके पुनर्नियोजन के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब विभाग को देना चाहिए।

करोड़ों के निर्माण में निगरानी किसकी जिम्मेदारी?

छात्रावास भवन जैसे बड़े निर्माण कार्यों में तकनीकी अधिकारियों की भूमिका केवल कागजी सत्यापन तक सीमित नहीं रह सकती। स्थल निरीक्षण, निर्माण की प्रगति, सामग्री की गुणवत्ता, माप पुस्तिका, बिल भुगतान और पूर्णता प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का वास्तविक स्थल से मिलान होना जरूरी है।

ऐसे में सवाल यह भी है कि जिले में एक साथ चल रहे विभिन्न छात्रावास निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी कौन कर रहा है? क्या सभी निर्माण स्थलों का भौतिक निरीक्षण किया गया है? निरीक्षण की तारीख, निरीक्षणकर्ता अधिकारी और निरीक्षण रिपोर्ट क्या उपलब्ध है? क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई गई है?

विभाग से जवाब का इंतजार

पूरे मामले को लेकर जब आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त गोपेश मनहर से फोन कॉल के माध्यम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो फोन रिसीव नहीं किया गया। विभागीय पक्ष सामने आने के बाद खबर में उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब जरूरत इस बात की है कि करोड़ों रुपये के इन निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, स्थल निरीक्षण से संबंधित अभिलेखों की जांच, माप पुस्तिका एवं भुगतान रिकॉर्ड का परीक्षण तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं और निगरानी व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक तो नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!