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स्वतंत्रता के अधिकार का हनन,पुलिस ने मां-बेटी को बेवजह भेजा जेल,हाईकोर्ट को फटकार

बिलासपुर/छत्तीसगढ़ में नया नया रुख बदला आखिर मां-बेटी को गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने रिटायर्ड शिक्षिका मां और इंजीनियरिंग छात्रा उसकी बेटी को बिना वारंट और बिना अपराध के गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में पुलिस को 3 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना है कि पुलिस ने दोनों के स्वतंत्रता के अधिकार हनन किया है।जवाब में पुलिस की तरफ से बताया कि पुलिस शिकायत की जांच करने मौके पर पहुंची थी। पता चला कि पड़ोसी सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर अपनी जमीन पर वैध तरीके से बाउंड्री वॉल बना रहे थे। मां- बेटी के विवाद करने की पुलिस से शिकायत की गई। शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस से मां और बेटी ने विवाद किया। समझाइश के बाद भी रवैया नहीं बदलने पर दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस थाने लेकर आई। इसके तत्काल बाद महिला के बेटे को उसके मोबाइल पर सूचना दी गई थी।पुलिस ने शाम को उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया और अगले दिन उन्हें जमानत मिल सकी।

स्वतंत्रता के अधिकार का हनन…आखिर क्यों

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हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने माना कि मां बेटी को पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार कर संविधान में किसी नागरिक को अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि पीड़ित मां को एक लाख रुपये व उसकी बेटी को 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति 30 दिन के भीतर प्रदान करे।गौरतलब है कि इससे पूर्व भी पुलिस द्वारा कुछ मामलों में आरोपी को नियम के विरुद्ध गिरफ्तार किये जाने पर हाई कोर्ट, बिलासपुर की पुलिस को फटकार लगा चुकी है। बावजूद इसके पुलिस द्वारा ऐसे मामले में कार्रवाई की गई जिसमें गिरफ्तार मां-बेटी खुद पीड़ित थे। नियम यह भी है कि जिस अपराध में 7 साल से कम की सजा हो, तब उसके आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस ने केवल इस आधार पर कि मां-बेटी ने जवानों से झगड़ा किया, उन्हें गिरफ्तार करके जेल तक भेज दिया। हालांकि यह भी देखने वाली बात है कि दोनों को जिस मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, उसने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया और मां-बेटी को जमानत पर छोड़ने की बजाय जेल भिजवा दिया।

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