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सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है: व्यास अशोककृष्ण महाराज

सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है: व्यास अशोककृष्ण महाराज

“”वन पूर्णाहुति भंडारा प्रसाद के साथ सप्तदिवसीय भागवत कथा का समापन””

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“सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:”की भावना को अपनाकर व्यक्ति को श्रेष्ठ सदाचार का पालन करना चाहिए यही मानव धर्म की विशेषता है: व्यासजी

“भगवान ने सुदामा को बिना मांगे सब कुछ दे दिया”जीवन में यदि एक सच्चा मित्र मिल जाए तो आपका जीवन धन्य है: पंडित अशोककृष्ण

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“मित्रता की मिशाल भगवान श्रीकृष्ण सुदामा जी के जीवन चरित्र से परिलक्षित होता है”:आचार्य व्यास जी

पेंड्रा/कोटमी:- गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम सेखवा में 15 जून से 22 जून तक भव्य संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन पंडित पूरन लाल शर्मा परिवार में किया गया था।इस धार्मिक कार्यक्रम में वृन्दावन धाम से पधारे पंडित अशोककृष्ण व्यास जी महाराज “ज्योतिषाचार्य” ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराया।इस कथा आयोजन में महाराज श्री ने श्रद्धालुओं भक्तों व शिष्यों को धार्मिक अनुष्ठान के क्रियान्वयन में जीवन में सदाचार,सत्संगति,माता पिता की सेवा समर्पण भाव,सत्कर्म सहित धर्म ग्रन्थ वेद पुराणों का अनुसरण कर अपनाने हेतु कहा। आयोजन के मुख्य यजमान सेवानिवृत्त पटवारी पंडित पूरनलाल शर्मा थे।इस कथा को श्रवण करने स्थानीय ग्रामवासियों के अलावा आसपास क्षेत्र के भक्त परिकर श्रद्धालुजन मुख्य रूप से उपस्थित हुए।भगवान श्रीकृष्ण की जीवंत झांकी सहित वामन भगवान, माता रुक्मणि श्रीकृष्ण,सुदामा एवं भगवान के बालस्वरुपों की सुंदर झांकी निकाली गई।रुक्मणि मंगल में भगवान श्रीकृष्ण जी की बारात तिराहा कोटमी अतुल अग्निहोत्री परिवार से कथा आयोजन स्थल तक बैंडबाजे व आतिशबाजी के साथ धूमधाम से निकाली गई।

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वृन्दावन धाम से पधारे व्यास जी ने कथा के सप्तम दिवस में भगवान श्रीकृष्ण सुदामा के सुंदर बाल चरित्रों का वर्णन करते हुए गृहस्थी जीवन को कैसे जीना चाहिए,जीवन में आने वाली कठिनाइयों व चुनौतियों का सामना कैसे किया जाना चाहिए?के बारे में प्रेरणात्मक उद्बोधन देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिए।कथा आयोजन के बीच ही पेंड्रा नगर पालिका के अध्यक्ष राकेश जालान,मरवाही विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक डॉ.के.के.ध्रुव,पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज गुप्ता,पूर्व सरपंच इतवार सिंह ओट्टी,उपसरपंच रविन्द्र कैवर्त ,पुलिस चौकी कोटमी पवन राठौर,सीताराम कैवर्त सहित सूरजपुर,पेंड्रा,सेखवा,कोटमी के शिष्यों ने व्यासपीठ को प्रणाम कर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किए।

व्यासपीठ से आचार्य अशोककृष्ण महाराज जी ने सातवें दिवस की कथा में कहा कि मित्रता की मिशाल यदि देखनी हो तो भगवान श्रीकृष्ण सुदामा जी के जीवन चरित्र से देखा व सीखा जा सकता है।गुरुकुल में साथ साथ ज्ञानार्जन करने के पश्चात मित्रता के बंधन को जीवन पर्यंत निभाया।कृष्ण सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता और त्याग का एक अमर पौराणिक प्रसंग है इस कथा चरित्र से परिलक्षित होता है कि प्रेम और मित्रता सामाजिक या आर्थिक स्थिति (अमीर गरीब) से ऊपर होती है।सुख दुःख और विपत्तियों में एक सच्चे मित्र की पहचान होती है।जीवन में यदि एक सच्चा मित्र मिल जाए तो आपका जीवन धन्य है।भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा बचपन के मित्र थे।शिक्षा पूरी होने के बाद अपने अपने जीवन में आगे बढ़ गए।कृष्ण मथुरा और द्वारका के राजा बने,जबकि सुदामा एक अत्यंत साधारण और गरीब ब्राह्मण बने और सादगी भरा जीवन व्यतीत करने लगे।जब भगवान से सुदामा का मिलन हुआ तो भगवान ने उन्हें गले से लगाया और अपने आंसुओं से सुदामा के पैर धोने लगे।

भगवान ने बिना मांगे सब कुछ दे दिया।सुदामा संकोच के कारण अपनी गरीबी परेशानी कृष्ण को बता नहीं पाए”भगवान ने अपनी अलौकिक शक्ति और मित्रता के भाव से सुदामा की अंतर्मन की पीड़ा को समझ लिया।चावल की पोटली में भगवान के प्रति भाभी का अनन्य प्रेम भाव छिपा था जिसे भगवान ने सुदामा से लिया और दो मुट्ठी चावल खाते ही बिना मांगे सुदामा को सब कुछ दे दिया।एक सच्चा मित्र बिना कहे ही अपने मित्र को समझ लेता है और बदले में निस्वार्थ भाव से उसकी मदद करता है।व्यास जी ने कहा कि सनातनियों को अपने कर्तव्य के साथ साथ धर्म की रक्षा के प्रति समर्पित रहना चाहिए।”सर्वे भवन्तु सुखिन:सर्वे सन्तु निरामया:” की भावना को अपनाकर व्यक्ति को श्रेष्ठ सदाचार का पालन करना चाहिए यही मानव धर्म है यही जीवन की सार्थकता है।

कथा समाप्ति के पश्चात उत्साह पूर्ण हवन पूर्णाहुति का कार्य सम्पन्न हुआ आचार्यों की दक्षिणा पूजन सम्मान विधिविधान के साथ किया गया तदोपरांत ब्राह्मण भोजन कराया गया और भंडारा प्रसाद वितरण के साथ कथा अनुष्ठान का विश्राम किया गया। इस आयोजन की सफलता में चंद्रकांत शर्मा अरुण शर्मा,निशांत तिवारी,सूर्यकांत चतुर्वेदी सहित घर परिवार रिश्तेदारों की विशेष भूमिका रही तथा स्थानीय लोगों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।

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