गरीब आदिवासी किसानों से कथित अवैध वसूली!” हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल का VIDEO वायरल, सुशासन के दावों पर उठे सवाल

मिथलेश आयम, कोरबा/पसान। प्रदेश सरकार जहां गांव-गांव “सुशासन तिहार” मनाकर पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले के पोड़ी उपरोडा अनुभाग अंतर्गत तहसील पसान के ग्राम हल्का नंबर 10 सिर्री-पिपरिया से सामने आए रिश्वतखोरी के VIDEO ने पूरे राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे VIDEO में हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल खुलेआम पैसा लेते दिखाई दे रहे हैं। VIDEO सामने आने के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश है और ग्रामीणों में नाराजगी का माहौल बन गया है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि वन पट्टा ऑनलाइन करने के नाम पर ₹5,000 और फौती नामांतरण के लिए ₹10,000 तक की रकम वसूली जाती है।
सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि कथित वसूली का शिकार गरीब आदिवासी किसान हो रहे हैं, जिन्हें अपने ही हक के सरकारी काम करवाने के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्का क्षेत्र में लंबे समय से “पैसा दो तभी काम होगा” जैसी व्यवस्था चल रही है। आरोप है कि बिना रकम दिए राजस्व संबंधी फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और किसानों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर कटवाए जाते हैं। अब VIDEO वायरल होने के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर गरीब किसानों से कथित तौर पर खुलेआम पैसे लिए जा रहे हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इलाके में चर्चा है कि यदि गरीब आदिवासी किसानों को अपने ही हक के काम के लिए रिश्वत देनी पड़े, तो फिर “सुशासन तिहार” जैसे अभियान केवल दिखावा बनकर रह जाते हैं। ग्रामीणों ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि कुछ कर्मचारी गरीबों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना चुके हैं। VIDEO वायरल होने के बाद अब ग्रामीणों ने संबंधित पटवारी पर तत्काल निलंबन, निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पूरे हल्का क्षेत्र में हुए नामांतरण और वन पट्टा प्रकरणों की जांच कराने की मांग भी उठने लगी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बड़ा सवाल…क्या वायरल VIDEO के बाद प्रशासन भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर गरीब आदिवासी किसानों की आवाज एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी?














