
“बीएमओ के नाम पर फील्ड में प्रैक्टिस का दावा! वायरल ऑडियो से मचा हड़कंप, स्वास्थ्य कर्मचारी को 24 घंटे में जवाब देने का नोटिस”
कोटा/बिलासपुर। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन दूसरी ओर कुछ मामलों में स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी और कर्मचारियों की कार्यशैली पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड से सामने आया एक मामला इन दिनों स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. निखिलेश गुप्ता ने ग्राम कोनचरा में पदस्थ मल्टी पर्पस टेक्नीशियन (एमटी) फागूराम कैवर्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस क्रमांक बीएमओ/2026/1373 के माध्यम से कर्मचारी से वायरल ऑडियो और कथित गतिविधियों के संबंध में जवाब मांगा गया है।

खबर प्रकाशित होने के बाद मचा बवाल…?
जानकारी के अनुसार, कोटा-बेलगहना क्षेत्र में कथित झोलाछाप चिकित्सकों और अवैध चिकित्सा गतिविधियों को लेकर “खबरों का राजा”मीडिया में समाचार प्रमुखता से चलाया था। इसके बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में स्वास्थ्य कर्मचारी फागूराम कैवर्त की कथित टिप्पणियों और एक वायरल ऑडियो को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में यह दावा किया गया कि स्वयं बीएमओ द्वारा फील्ड में जाकर प्रैक्टिस करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऑडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई।

मीडिया की सूचना पर हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग….?
स्थानीय मीडियाकर्मियों द्वारा इस पूरे मामले और वायरल ऑडियो की जानकारी फोन के माध्यम से खंड चिकित्सा अधिकारी को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आखिर वायरल ऑडियो में किए गए दावों का वास्तविक आधार क्या है और क्या किसी सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारी द्वारा अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से अलग जाकर निजी स्तर पर चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
24 घंटे में जवाब नहीं तो होगी कार्रवाई..?
जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी को पत्र प्राप्त होने के एक दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता या दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सीएमएचओ को भी भेजी गई रिपोर्ट…?
मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस और पत्राचार की प्रति मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बिलासपुर को भी भेजी गई है, ताकि आवश्यकतानुसार उच्च स्तर पर जांच और कार्रवाई की जा सके।
सबसे बड़ा सवाल — क्या ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रही है समानांतर चिकित्सा व्यवस्था?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कोई सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी निर्धारित ड्यूटी से इतर फील्ड में चिकित्सकीय प्रैक्टिस करता है या ऐसा करने के दावे सामने आते हैं, तो यह न केवल सेवा नियमों बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सवाल यह भी है कि आखिर ग्रामीण इलाकों में कथित झोलाछाप गतिविधियों और अनधिकृत चिकित्सा सेवाओं पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो पा रही है? यदि वायरल ऑडियो में किए गए दावे गलत हैं तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए, और यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।
अब पूरे मामले में सबकी नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच और संबंधित कर्मचारी के जवाब पर टिकी हुई है।















