
भ्रष्टाचार की पोल खुलते ही बौखलाया आमागोहन सचिव: निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने के लिए पत्रकार को , कहा—’कितना छापोगे?’
*जीशान अंसारी की कलम से*

कोटा/बिलासपुर।15वें वित्त आयोग के सरकारी खजाने पर डाका डालने वाले आमागोहन के पंचायत सचिव राजेश कुमार उइके पर जब निलंबन की गाज गिरी, तो उसकी बौखलाहट सातवें आसमान पर पहुंच गई। अपनी काली करतूतों के सार्वजनिक होने से तिलमिलाए इस दागी सचिव ने उल्टे निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने की जुर्रत कर डाली। ‘चोरी और ऊपर से सीनाजोरी’ की तर्ज पर इस महाशय ने सीधे पत्रकार को फोन घुमाया और तल्ख तेवर में अपनी भड़ास निकालते हुए कहा -“कितना छापोगे? कितना बदनाम करोगे? कर तो लिए, पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीट दिया!”
*कागजों में नाली, जेब में माल भ्रष्टाचार का नंगा सच :-*

यह पूरा बवाल 3 सितंबर 2026 को जिला पंचायत बिलासपुर के उस निलंबन आदेश के बाद मचा है, जिसने आमागोहन पंचायत में मची लूट का पर्दाफाश कर दिया। जनपद पंचायत कोटा की जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि 15वें वित्त आयोग की राशि से मौके पर कोई नाली बनी ही नहीं, लेकिन कागजों में फर्जीवाड़ा कर पूरी सरकारी रकम डकार ली गई। जब प्रशासन ने इस गबन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो 20 जुलाई 2026 को सचिव ने ऐसी लचर लीपापोती की, जिसे जिला पंचायत ने एक झटके में रद्दी की टोकरी में डाल दिया। नतीजा भ्रष्ट सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर कोटा जनपद अटैच कर दिया गया।
*फंसती गर्दन देख ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ की घटिया नौटंकी :-*

जब धौंस और दबंगई काम नहीं आई, तो सचिव ने पैंतरा बदला और ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ की कायरतापूर्ण चाल चली। खुद को बेदाग साबित करने में पूरी तरह नाकाम इस शख्स ने पत्रकार को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर खबरें छपना बंद नहीं हुईं, तो वह ‘कहीं का नहीं रहेगा’ और खुद को खत्म कर लेगा। सरकारी ओहदे पर बैठे किसी कर्मचारी द्वारा अपनी खाल बचाने के लिए ऐसी आत्मघाती गीदड़ धमकी की देना, सीधे तौर पर मीडिया का मुंह बंद करने और प्रशासनिक कार्रवाई को भटकाने की एक घिनौनी साजिश है।
*’हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे’: सचिव की बेशर्मी :-*
अपनी कुर्सी छिनते और इज्जत नीलाम होते देख सचिव राजेश उइके ने दूसरों पर कीचड़ उछालने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। झल्लाहट में उसने कहा “दो अपराधी हैं, दोनों को एक-एक डंडा मारो ना, सिर्फ मेरे ही पीछे क्यों पड़े हो?”
इस पर पत्रकार ने दोटूक और करारा तमाचा जड़ते हुए जवाब दिया कि पत्रकारिता किसी से निजी खुन्नस निकालने का धंधा नहीं है। भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में सरपंच समेत जिसने भी हाथ धोए हैं, उनका काला चिट्ठा पहले ही दस्तावेजों के साथ छप चुका है। जब निलंबन का डंडा तुम्हारे नाम पर चला है, तो आईना भी तुम्हें ही दिखाया जाएगा। साक्ष्यों के आधार पर खबरें छपी हैं और आगे भी छपेंगी।
*’खबरों का राजा’ का खुला ऐलान: सच की कलम किसी धमकी से नहीं रुकेगी :-*
आमागोहन के इस महाघोटाले ने कोटा इलाके की बाकी ग्राम पंचायतों में भी मची लूट, कमीशनखोरी और 15वें वित्त आयोग के पैसों की बंदरबांट की पोल खोल दी है।
‘खबरों का राजा’ डंके की चोट पर यह ऐलान करता है कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने को दीमक की तरह चाटने वाले किसी भी भ्रष्टाचारी की न तो धमकियों से हम डरने वाले हैं और न ही किसी ‘इमोशनल ड्रामे’ के आगे झुकने वाले हैं। हमारी कलम सरकारी साक्ष्यों, जांच रिपोर्टों और पुख्ता दस्तावेजों की स्याही से चलती है। पंचायतों में बैठे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ यह सर्जिकल स्ट्राइक जारी रहेगी, चाहे कलम के सामने कोई भी रसूखदार क्यों न आ खड़ा हो!















