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5 हजार की रिश्वत, एक साल की प्रताड़ना!” गौरेला-पेंड्रा-मरवाही शिक्षा विभाग में महिला शिक्षिका के आरोप से मचा हड़कंप

5 हजार की रिश्वत, एक साल की प्रताड़ना!” गौरेला-पेंड्रा-मरवाही शिक्षा विभाग में महिला शिक्षिका के आरोप से मचा हड़कंप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। इस बार आरोप सीधे विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) संजीव शुक्ला और शाखा प्रभारी पर लगे हैं। एक महिला शिक्षक ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि एरियर्स भुगतान के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये की रिश्वत ली गई और इसके बावजूद उन्हें करीब एक साल तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।

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शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि शिकायतकर्ता शिक्षिका ने अपने आवेदन में यह दावा किया है कि रिश्वत लेन-देन से जुड़ी कॉल रिकॉर्डिंग भी उनके पास सुरक्षित है, जिसे वे जांच एजेंसी को सौंपने के लिए तैयार हैं।

जानकारी के अनुसार शासकीय विद्यालय इजराखांड, विकासखंड गौरेला में पदस्थ शिक्षिका कविता भतपहरी ने 14 मई 2026 को जिला कलेक्टर को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा। आवेदन में उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला एवं शाखा प्रभारी मीना मरावी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि उनका एरियर्स भुगतान लंबे समय से लंबित था। भुगतान कराने के लिए उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर कटवाए गए। जब उन्होंने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, तब कथित रूप से भुगतान जारी कराने के एवज में उनसे 5 हजार रुपये की अवैध राशि ली गई।

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शिक्षिका ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि रिश्वत देने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। उल्टा संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जाता रहा। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि लगभग एक वर्ष तक उनका एरियर्स भुगतान रोके रखा गया और हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर फाइल अटका दी गई। जब उन्होंने इस मामले को मीडिया और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की, तब जाकर 11 मई 2026 को भुगतान किया गया।
मामले को और ज्यादा संवेदनशील बनाता है शिकायतकर्ता का यह दावा कि रिश्वतखोरी से संबंधित बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। यदि जांच में यह रिकॉर्डिंग सही पाई जाती है, तो मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई की नौबत भी आ सकती है।
सूत्रों की मानें तो शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर अंदरखाने हलचल तेज हो गई है और कई अधिकारी अब पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। जिले के शिक्षा विभाग में लंबित भुगतान, एरियर्स, वेतन विसंगति और फाइलों के बदले कथित “सेटिंग” की चर्चाएं पहले भी उठती रही हैं। समय-समय पर कई शिक्षक और कर्मचारी मौखिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई का अभाव देखने को मिला।

शिक्षिका ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले भी शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अधिकारियों के हौसले और बढ़ गए हैं। आवेदन में स्पष्ट लिखा गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए रिश्वत की मांग करना और कर्मचारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
शिक्षिका ने कलेक्टर से मांग की है कि आरोपित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए, जांच पूरी होने तक उन्हें पद से पृथक या निलंबित किया जाए तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य शिक्षक को ऐसी प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।

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पूरा मामला अब जिला प्रशासन के पाले में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी, क्या कथित कॉल रिकॉर्डिंग की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का शिक्षा विभाग इस शिकायत को लेकर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।

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