
आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रेल लाइन के पार तो कहीं अधूरा पड़ा काम
जीशान अंसारी की कलम से

“कोटा विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; तुलुफ, मोहली और आमागोहन के मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग”
*बिलासपुर/कोटा।महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को लेकर कोटा विकासखंड में लगातार सवाल उठ रहे हैं। कहीं आंगनबाड़ी भवन बस्ती से दूर बनाए जाने का आरोप है, कहीं निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है तो कहीं राशि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू अथवा पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।


तुलुफ, मोहली और आमागोहन पंचायतों से सामने आ रहे मामलों ने न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, बल्कि स्थल चयन, तकनीकी निरीक्षण, भुगतान और विभागीय निगरानी की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कोटा विकासखंड में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को लेकर ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं।


तुलुफ में बस्ती से दूर, रेल लाइन के पार बन रहा आंगनबाड़ी भवन

सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत तुलुफ का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार जिस बस्ती के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए आंगनबाड़ी भवन बनाया जाना है, उसी बस्ती में भूमि उपलब्ध होने के बावजूद भवन को बस्ती से बाहर रेल लाइन के पार बनाया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित भवन तक छोटे बच्चों को पहुंचने के लिए सड़क और रेल लाइन पार करनी पड़ेगी। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है। पूर्व में सामने आई रिपोर्ट में भी तुलुफ में आंगनबाड़ी भवन को मुख्य बसाहट से काफी दूर रेल लाइन के पार बनाए जाने और निर्माण में उपयोग हो रही ईंटों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब बस्ती के भीतर अथवा उसके समीप भूमि उपलब्ध है तो आखिर भवन को ऐसी जगह क्यों बनाया जा रहा है, जहां छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पहुंचना कठिन है?
CM हेल्पलाइन शिकायत के बाद काम रोकने के आदेश, फिर भी निर्माण जारी होने का आरोप*
तुलुफ मामले में ग्रामीणों ने पहले CM हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांच हुई और विभागीय स्तर पर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ समय बाद बिना स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी के निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया। इस मामले ने विभागीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि कार्य रोकने का आदेश जारी किया गया था तो उसके बाद निर्माण दोबारा कैसे शुरू हुआ? यदि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी तो निर्माण स्थल की नियमित मॉनिटरिंग कौन कर रहा था?
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिकायत के बाद तैयार की गई रिपोर्ट अथवा पंचनामा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता और शिकायत को बंद कर दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।
खराब ईंटों के इस्तेमाल का आरोप
तुलुफ में निर्माणाधीन भवन को लेकर सिर्फ स्थल चयन ही नहीं बल्कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण में गुणवत्ताहीन ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। उनका सवाल है कि बच्चों के लिए बनाए जा रहे भवन में यदि शुरुआत से ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ तो भवन की मजबूती और टिकाऊपन कैसे सुनिश्चित होगा?
ग्रामीणों ने भवन में इस्तेमाल ईंट, सीमेंट, रेत, सरिया सहित अन्य सामग्री की तकनीकी जांच और सैंपल टेस्ट कराने की मांग की है। मोहली के बगबुड़ में जनमन योजना के भवन को स्थानांतरित करने पर सवाल
ग्राम पंचायत मोहली में भी दो आंगनबाड़ी भवनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इनमें से एक भवन बगबुड़ में जनमन योजना के तहत बैगा परिवारों के लिए स्वीकृत होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार अब इस भवन को दूसरी बस्ती में स्थानांतरित करने की चर्चा है। यदि भवन विशेष रूप से बैगा परिवारों की बस्ती के लिए स्वीकृत हुआ है तो उसका स्थान बदलने से सीधे उन्हीं परिवारों को इसका नुकसान होगा, जिनके लिए योजना लाई गई है।
ऐसे में सवाल है कि भवन का स्थल बदलने का निर्णय किस आधार पर लिया जा रहा है? क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई है? क्या प्रभावित परिवारों और ग्रामसभा की राय ली गई?
छपरापारा में भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
मोहली पंचायत के ही छपरापारा में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन को लेकर भी ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि भवन का निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय अभी से निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की जांच कराई जाए, ताकि बाद में खराब निर्माण सामने आने पर सिर्फ खानापूर्ति न करनी पड़े।
आमागोहन में राशि के बाद भी भवन निर्माण अधूरा
ग्राम पंचायत आमागोहन में भी आंगनबाड़ी भवन का मामला विवादों में है। ग्रामीणों के अनुसार भवन निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराए जाने के बावजूद निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया है। पहले से ही आंगनबाड़ी भवन से संबंधित समस्याओं को लेकर आमागोहन का मामला सामने आता रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार वहां पुराने जर्जर केंद्र के कारण बच्चों को वैकल्पिक स्थान पर बैठना पड़ रहा था और नए भवन के लिए चयनित भूमि को लेकर विवाद के कारण निर्माण प्रभावित हुआ।
आमागोहन पंचायत में हाल में पंचायत सचिव को हटाकर जनपद पंचायत कोटा कार्यालय में संलग्न किए जाने की कार्रवाई भी हुई है, हालांकि वह कार्रवाई अलग प्रशासनिक मामले से संबंधित बताई गई है।
लगभग 14 लाख रुपये के भवन, लेकिन गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?*
ग्रामीणों का आरोप है कि तुलुफ और आमागोहन में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी एक ही ठेकेदार को दिए जाने की स्थिति की भी जांच होनी चाहिए। लगभग 14 लाख रुपये की लागत वाले भवन यदि आधे-अधूरे अथवा गुणवत्ताहीन बनाए जा रहे हैं, तो सवाल सिर्फ निर्माण एजेंसी का नहीं बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जो भुगतान से पहले और निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दोनों पंचायतों में स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए।
इंजीनियर और परियोजना अधिकारी की निगरानी पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल निर्माण की तकनीकी निगरानी को लेकर है।*
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस इंजीनियर/तकनीकी अधिकारी को निर्माण की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए, उसका नियमित स्थल निरीक्षण दिखाई नहीं देता। आरोप है कि अधिकारी कार्यालय में बैठकर फाइलों और प्रस्तावों पर हस्ताक्षर कर देते हैं और मौके पर वास्तविक निर्माण की स्थिति की जांच नहीं होती।महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं।हालांकि विभाग की ओर से पहले यह कहा गया था कि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत है और गुणवत्ताहीन भवनों का निरीक्षण कराया जाएगा तथा मानक पूरे होने के बाद ही उन्हें हैंडओवर किया जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल*
आंगनबाड़ी भवन सिर्फ एक सरकारी भवन नहीं है। यहां छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और माताएं नियमित रूप से पहुंचती हैं। इसलिए भवन का स्थान ऐसा होना चाहिए जहां बच्चों को सुरक्षित और आसानी से पहुंच मिल सके। तुलुफ में यदि बच्चों को रेल लाइन और सड़क पार कर दूर स्थित भवन तक जाना पड़ेगा तो यह केवल सुविधा का नहीं बल्कि सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन जाता है।
तुलुफ ग्राम पंचायत कोटा जनपद पंचायत के अंतर्गत आती है और बिलासपुर जिला पंचायत की प्रशासनिक संरचना में है।
अब उच्चस्तरीय जांच की मांग
इन सभी मामलों को लेकर ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच स्थानीय स्तर के उन्हीं अधिकारियों से न कराई जाए जिनकी निगरानी में निर्माण कार्य चल रहे हैं।
उनकी मांग है कि जिला स्तर से स्वतंत्र तकनीकी टीम गठित कर तुलुफ, मोहली और आमागोहन में निर्माणाधीन तथा स्वीकृत सभी आंगनबाड़ी भवनों का भौतिक निरीक्षण कराया जाए।
साथ ही—
भवनों की तकनीकी गुणवत्ता जांच हो।
निर्माण सामग्री के सैंपल लेकर लैब टेस्ट कराया जाए।
स्वीकृत स्थल और वर्तमान निर्माण स्थल का मिलान किया जाए।
कार्यादेश और निर्माण एजेंसी की प्रक्रिया की जांच हो।
माप पुस्तिका, बिल और भुगतान की जांच की जाए।
पूर्व में कार्य रोकने के आदेश के बावजूद तुलुफ में निर्माण कैसे शुरू हुआ, इसकी जांच हो।
शिकायतों के निराकरण में तैयार पंचनामा और रिपोर्ट का पुनः सत्यापन हो।
दोषी पाए जाने पर ठेकेदार, तकनीकी अधिकारी एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
*बड़ा सवाल: बच्चों के लिए भवन या सिर्फ निर्माण का लक्ष्य?*
कोटा विकासखंड में सामने आ रहे इन मामलों ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है—आंगनबाड़ी भवन वास्तव में बच्चों और माताओं की सुविधा के लिए बनाए जा रहे हैं या सिर्फ निर्माण का लक्ष्य पूरा करने के लिए?
यदि भवन बस्ती से दूर होगा, बच्चे सुरक्षित तरीके से वहां नहीं पहुंच पाएंगे, निर्माण की गुणवत्ता खराब होगी और राशि खर्च होने के बाद भी भवन समय पर उपयोग में नहीं आएगा, तो ऐसी योजना का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक कैसे पहुंचेगा?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर स्वतंत्र जांच कराता है या मामला एक और विभागीय रिपोर्ट तक सीमित रह जाता है।















