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“वन्यजीव सुरक्षा के दावे ध्वस्त! कुदरद वेली रिसॉर्ट में हिरण मांस कांड ने खोली वन विभाग की लापरवाही की पूरी पोल”

वन विभाग की लापरवाही से ‘जंगल का कत्ल’! कुदरद वेली रिसॉर्ट में पक रहा था हिरण का मांस, मैनेजर सहित 4 गिरफ्तार, सप्लायर फरार”

बिलासपुर/कोटा (बेलगहना) – जंगल की सुरक्षा के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। बेलगहना से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित कुदरद वेली रिसॉर्ट में कथित रूप से हिरण का मांस पकाए जाने का मामला सामने आने के बाद अब वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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जानकारी के अनुसार, रिसॉर्ट के किचन के बाहर खुले में हिरण का संदिग्ध मांस पकाया जा रहा था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से गतिविधियां चलने की आशंका जताई जा रही है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि कहीं न कहीं निगरानी में बड़ी चूक हुई है।

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सूचना मिलने के बाद हरकत में आए वन विभाग ने शाम करीब 6 बजे दबिश दी। मौके से पका हुआ मांस, कढ़ाई और अन्य सामग्री जब्त की गई। इस दौरान मैनेजर रजनीश सिंह समेत कर्मचारी रमेश यादव, संजय वर्मा और रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी जनक बैगा फरार हो गया।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि सुबह ही मांस सप्लाई किया गया था और उसे खुलेआम पकाया जा रहा था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर यह गतिविधि दिनदहाड़े चल रही थी, तो वन अमला आखिर कहां था? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी ‘मिलीभगत’ की बू आ रही है?

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वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब्त मांस को जांच के लिए जबलपुर लैब भेजा जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह हिरण का मांस है या नहीं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि यह रिसॉर्ट पर्यटन विभाग के अंतर्गत संचालित है और यहां 8 से 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में यह भी आशंका जताई जा रही है कि क्या यहां लंबे समय से वन्यजीवों का शिकार कर उन्हें परोसा जा रहा था और विभाग आंखें मूंदे बैठा था?
यह मामला बेलगहना वन परिक्षेत्र का है, जहां वन रक्षक संतकुमार वाकरे और रेंजर देवसिंह मरावी के क्षेत्राधिकार में यह पूरी घटना हुई है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या जिम्मेदारी तय होगी या मामला सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल वन विभाग जांच की बात कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि एक और बेजुबान वन्यजीव की जान गई—और जिम्मेदार तंत्र समय पर उसे बचाने में नाकाम रहा।

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