
रायपुर निगम में ‘फाइल गायब’ कांड! 100 करोड़ के खेल में मची खलबली, चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित
रायपुर। नगर पालिक निगम में कथित 100 करोड़ के बड़े घोटाले की बू अब तेज होने लगी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना की स्वीकृतियों में भारी गड़बड़ी के आरोप सामने आते ही निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। निगम आयुक्त विश्वदीप ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है, जिससे पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल जांच कमेटी की कमान अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जबकि नगर निवेश और इंजीनियरिंग शाखा के अफसर भी इसमें शामिल किए गए हैं। टीम को साफ निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और जल्द रिपोर्ट सौंपी जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों के इस खेल में फाइलें कहां गायब हो गईं? आरोप है कि कॉलोनियों और निर्माण कार्यों की स्वीकृति में नियमों को खुलेआम ताक पर रख दिया गया। प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए फाइलें सीधे जोन कार्यालय से प्लानिंग विभाग तक पहुंचाई गईं—वो भी बिना आयुक्त की मंजूरी के! जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और मूल फाइलें नदारद पाई गईं, जिससे पूरे मामले में गहरी साजिश की आशंका और मजबूत हो गई है।

मामला सिर्फ कागजी खेल तक सीमित नहीं है। बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर जैसे इलाकों में जमीनों की स्वीकृति और रिकॉर्ड को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के लिए नियमों का खुला उल्लंघन किया गया और बाद में सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
विपक्ष ने भी इस घोटाले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत से करोड़ों का खेल खेला गया और पूरे सिस्टम को ही बायपास कर दिया गया।

फिलहाल निगम प्रशासन जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने की बात कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार बड़े चेहरे बेनकाब होंगे या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस कथित घोटाले के सबसे बड़े राज खोल सकती है।















