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रायपुर

गैर-पात्र लाभार्थी का वन अधिकार पट्टा कलेक्टर द्वारा निरस्त, तहसीलदार को राजस्व अभिलेख संशोधन के निर्देश

गैर-पात्र लाभार्थी का वन अधिकार पट्टा कलेक्टर द्वारा निरस्त, तहसीलदार को राजस्व अभिलेख संशोधन के निर्देश

कोरबा:- वन अधिकार अधिनियम 2006 (संशोधित अधिनियम 2012) के तहत पात्रता की समीक्षा के क्रम में कोरबा जिले के कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अजीत वसंत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गैर-पात्र व्यक्ति को जारी किए गए वन अधिकार पट्टे को निरस्त कर दिया है। साथ ही उन्होंने संबंधित राजस्व अभिलेखों को छत्तीसगढ़ शासन के पक्ष में दुरुस्त करने हेतु तहसीलदार, पोड़ी उपरोड़ा को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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मामले की पृष्ठभूमि:

प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यायालय कलेक्टर कोरबा द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2025 को पारित आदेश में यह पाया गया कि अनावेदक श्री रामावतार, पिता श्री देवनारायण, जाति – गोंड, मूल निवासी ग्राम कुम्हारीसानी, द्वारा ग्राम कांसामार, पटवारी हल्का नंबर 34, तहसील पोड़ी उपरोड़ा, जिला कोरबा में खसरा नंबर 16/1 से रकबा 1.216 हेक्टेयर भूमि पर अधिकार प्राप्त कर वन अधिकार पट्टा जारी किया गया था।हालांकि, विस्तृत जांच और अभिलेखीय परीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि श्री रामावतार विगत मात्र 4-5 वर्षों से ही ग्राम कांसामार में निवासरत हैं। वे इस ग्राम के मूल निवासी नहीं हैं, जो कि वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम के तहत आवश्यक पात्रता की मूल शर्त है।

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कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन:

वन अधिकार अधिनियम 2006 एवं संशोधित अधिनियम 2012 के अनुसार, अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी व्यक्ति को वन अधिकार पट्टा केवल तभी प्रदान किया जा सकता है जब वह:
1. दिनांक 13 दिसंबर 2005 के पूर्व से संबंधित भूमि पर वास्तविक कब्जाधारी हो, तथा
2. जिस ग्राम में भूमि स्थित है, वह उसका मूल निवास स्थान हो।
इन दोनों आवश्यकताओं में श्री रामावतार अयोग्य पाए गए। परिणामस्वरूप, उन्हें प्रदान किया गया वन अधिकार पट्टा निरस्त कर दिया गया, और उक्त भूमि — जो अब खसरा नंबर 16/13 (बटांकन उपरांत) के अंतर्गत आती है — को छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व में पुनः दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

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प्रशासन की स्पष्टता और कड़ाई:

कलेक्टर श्री अजीत वसंत द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि वन अधिकार अधिनियम के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और इस प्रकार के सभी मामलों में साक्ष्य आधारित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देशित किया है कि संबंधित तहसीलदार समयबद्ध रूप से राजस्व अभिलेखों को अद्यतन कर संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

महत्वपूर्ण संकेत और संभावित कार्रवाई:

इस आदेश को जिले में भूमि प्रबंधन और वन अधिकारों के न्यायसंगत वितरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह संदेश साफ है कि शासन द्वारा प्रदत्त योजनाओं और अधिकारों का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो वास्तविक रूप से पात्र हैं।

प्रशासन द्वारा यह भी संकेत दिया गया है कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पूर्व में जारी सभी पट्टों की चरणबद्ध समीक्षा की जाएगी, ताकि यदि कहीं भी अनुचित या अवैध रूप से लाभ लिया गया है तो उसे तत्काल निरस्त किया जा सके।

यह निर्णय कोरबा जिले में शासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और विधिसम्मत प्रशासन की नीति को दर्शाता है। इससे स्पष्ट होता है कि शासन अपने संसाधनों एवं अधिकारों के वितरण में पूर्ण न्याय और प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है

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