पसान वन परिक्षेत्र में ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’ ड्यूटी रेंजर की जांच जारी, इधर मुख्य सड़क पर कट गए सागौन के बेशकीमती पेड़!

चंद्रौटी के बाद अब खम्हरिया बीट में सागौन के बेशकीमती पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी; ड्यूटी रेंजर उषा सोनवानी पर फिर उठ रहे मिलीभगत के गंभीर सवाल
मिथलेश आयम, पसान/कटघोरा। कटघोरा वनमण्डल का अंतिम छोर इन दिनों वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ‘कृपा’ से लकड़ी तस्करों के लिए अड्डा बन चुका है। वन परिक्षेत्र कार्यालय पसान के तहत आने वाले चंद्रौटी बीट का वीडियो वायरल मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था, कि अब खम्हरिया बीट में बेशकीमती सागौन के प्लांटेशन को बेरहमी से उजाड़ने का एक और सनसनीखेज कारनामा सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्य सड़क के ठीक किनारे लगे सागौन के भारी-भरकम इमारती पेड़ों को अंधाधुंध काट दिया गया, लेकिन विभाग के मैदानी अमले को इसकी ‘भनक’ तक नहीं लगी।

जांच के घेरे में घिरीं ड्यूटी रेंजर, फिर भी बेखौफ हौसले :-
याद हो कि कुछ ही दिनों पहले इसी इलाके की ड्यूटी रेंजर उषा सोनवानी पर खुद खड़े होकर लकड़ी कटवाने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था। इस रसूखदार मामले की विभागीय जांच अभी कछुआ गति से चल ही रही है कि ठीक उसी नाक के नीचे खम्हरिया बीट में सागौन का यह नया अवैध कटाई का खेल दिया गया। सूत्र बताते हैं कि ड्यूटी रेंजर मैडम की मर्जी के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता, ऐसे में मुख्य मार्ग पर स्थित सरकारी प्लांटेशन से लाखों की इमारती लकड़ी का पार हो जाना, सीधे तौर पर ड्यूटी रेंजर उषा सोनवानी की मिलीभगत और कथित संरक्षण की ओर इशारा कर रहा है।

गार्ड का गैर-जिम्मेदाराना राग “मुझे कुछ नहीं पता” :-
इस पूरे घोटाले पर जब खम्हरिया बीट में पदस्थ बीट गार्ड कोराम से सीधे सवाल किए गए, तो उनका जवाब विभागीय लापरवाही का सबसे भद्दा उदाहरण था। गार्ड कोराम ने साफ शब्दों में कह दिया— “मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।” अब सवाल यह उठता है कि जो प्लांटेशन सीधे मुख्य सड़क से सटा हुआ है, जहां से दिन-रात गाड़ियां गुजरती हैं, वहां अपराधियों की इस तरह पेड़ों पर आरी चला दी गई और गश्त का दम भरने वाले वन विभाग को कानों-कान खबर नहीं हुई? यह ‘अज्ञानता’ महज़ एक इत्तेफाक है या फिर सच को छुपाने की सोची-समझी साजिश?

जनता के टैक्स के पैसों पर डाका, कब जागेगा उच्च प्रबंधन :-
सड़क किनारे कटे पड़े ठूंठ चिल्ला-चिल्लाकर वन विभाग की मिलीभगत की गवाही दे रहे हैं। रेंजर की संदिग्ध भूमिका और बीट गार्ड की रहस्यमयी खामोशी यह बताने के लिए काफी है कि कटघोरा वनमण्डल में ‘रक्षक ही भक्षक’ की भूमिका में आ चुके हैं। अब देखना यह होगा कि इस खुलेआम मचे तांडव पर वनमण्डल के उच्च अधिकारी रेंजर और गार्ड पर कड़ी कार्रवाई की हिम्मत दिखाते हैं, या फिर हमेशा की तरह जांच की फाइल को ठंडे बस्ते में डालकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।















