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एक साल से मुआवजा अटका, अब सुशासन तिहार में होगा घेराव!” — बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

“एक साल से मुआवजा अटका, अब सुशासन तिहार में होगा घेराव!” — बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला ग्रामीणों के साथ पहुंचे तहसील कार्यालय, बोले—‘सुशासन नहीं, सिर्फ कागजी आश्वासन चल रहा’

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जीशान अंसारी की रिपोर्ट ,कोटा/बेलगहना। कोटा विधानसभा क्षेत्र के वनांचल इलाकों में रहने वाले बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम पंचायत मंझगंवा के आश्रित ग्राम सरार टिकरा में जवस नदी किनारे बसे 61 परिवार पिछले वर्ष हुई अतिवृष्टि से प्रभावित हुए थे। कई परिवारों के घरों और दैनिक जीवन पर इसका गंभीर असर पड़ा था। शासन की ओर से इन प्रभावित परिवारों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6/4) के तहत आर्थिक सहायता मिलनी थी, लेकिन लगभग एक साल गुजर जाने के बाद भी ग्रामीणों को अब तक राहत राशि नहीं मिल सकी है।
मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला से मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताई। इसके बाद संदीप शुक्ला ग्रामीणों के साथ बेलगहना तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार से पूरे मामले की जानकारी ली। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन और प्रशासन सिर्फ फाइलें घुमाने में लगा हुआ है, जबकि बाढ़ पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
तहसीलदार रोशन साहू ने बताया कि प्रभावित परिवारों के प्रकरण तैयार कर एसडीएम कोटा कार्यालय भेजे जा रहे हैं और राशि आबंटन होते ही वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि ग्रामीण इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर मुआवजा मिल जाता तो उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। प्रभावित ग्रामीण विजय भानु ने नाराजगी जताते हुए कहा कि शासन से केवल 3000 रुपये मुआवजा मिलने की जानकारी दी गई है, जबकि उससे ज्यादा रकम तो आने-जाने और कागजी प्रक्रिया में खर्च हो चुकी है।
मामला सिर्फ सरार टिकरा तक सीमित नहीं है। करही कच्छार और रतखंडी के ग्रामीण भी लंबे समय से मुआवजे की मांग को लेकर भटक रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सरकार के “सुशासन तिहार” के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो काम एक-दो महीने में पूरा होना चाहिए था, वह एक साल बाद भी अधूरा पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी 21 मई को मिठू नवागांव में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
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“जो काम एक-दो महीने में होना चाहिए, वह सालभर बाद भी नहीं हो रहा। ऐसे में भाजपा सरकार को सुशासन की सरकार कहना बेमानी है। यदि 21 मई के जिला स्तरीय शिविर में ग्रामीणों को राशि नहीं मिली तो अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।” संदीप शुक्ला, पूर्व जनपद अध्यक्ष कोटा
“प्रभावित ग्रामीणों के प्रकरण तैयार कर कोटा भेजे गए हैं। राशि आबंटन होते ही वितरण किया जाएगा।”रोशन साहू, तहसीलदार बेलगहना
“हमें 3000 रुपये मुआवजा मिलने की जानकारी मिली है, लेकिन उससे ज्यादा पैसा तो दफ्तरों के चक्कर लगाने में खर्च हो गया।”विजय भानु, प्रभावित ग्रामीण 

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