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“राहत नहीं, ‘उगाही का जाल’! मरवाही में RI अभिषेक त्रिपाठी पर बड़ा आरोप—पैसे लिए, न मदद मिली न रकम लौटी, अब ऑडियो से खुली पोल”

राहत नहीं, ‘उगाही का जाल’! मरवाही में RI अभिषेक त्रिपाठी पर बड़ा आरोप—पैसे लिए, न मदद मिली न रकम लौटी, अब ऑडियो से खुली पोल”

जीपीएम में एक और घोटाला, सिस्टम पर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में पहले से चल रहे जमीन घोटालों की गूंज के बीच अब एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार आरोप सीधे राजस्व विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी पर है, जिस पर राहत राशि दिलाने के नाम पर 1.5 लाख रुपये की वसूली करने का आरोप लगा है।
मरवाही निवासी स्नेहिल गुप्ता ने थाने में दिए आवेदन में बताया कि 15 जून 2025 को हुई दुर्घटना के बाद जब वे जेल अभिरक्षा में थे, उसी दौरान 16 जून को राजस्व निरीक्षक अभिषेक त्रिपाठी उनके पिता के पास पहुंचे।
“राहत दिलवाएंगे” कहकर लिया पैसा
आरोप है कि अधिकारी ने मृतक के परिजनों को तहसील से मिलने वाली राहत राशि का हवाला देते हुए तत्काल 1,50,000 रुपये की मांग की। यह भी भरोसा दिया गया कि बाद में शासन से मिलने वाली राशि से पैसे लौटा दिए जाएंगे।
पीड़ित परिवार ने भरोसा कर रकम दे दी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न कोई राहत राशि मिली और न ही पैसे वापस किए गए।
वायरल ऑडियो ने खोली पोल
मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़ित और आरोपी के बीच की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ऑडियो में पैसों के लेन-देन की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत में अधिकारी द्वारा राशि लेने की स्वीकारोक्ति जैसे संकेत भी मिल रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। धमकी देकर दबाने की कोशिश
पीड़ित का आरोप है कि जब पैसे वापस मांगने का दबाव बनाया गया, तो अधिकारी ने कहा—
“तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, मैं सरकारी आदमी हूं।” इस बयान ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर और आपराधिक बना दिया है।

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गवाह भी मौजूद, मामला और पुख्ता
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1.5 लाख रुपये की नगद राशि पिंटू सुमेर, वाहिद खान और राकेश चंद्रा के सामने दी गई थी। ऐसे में यह मामला सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि गवाहों के साथ मजबूत होता नजर आ रहा है। “नया सिस्टम” या संगठित उगाही?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह किसी अधिकारी का निजी “नया नियम” है या फिर राजस्व विभाग में चल रहा कोई बड़ा वसूली नेटवर्क?
क्योंकि सरकारी नियमों में आरोपी पक्ष से इस तरह पैसे लेकर राहत दिलाने का कोई प्रावधान नहीं है।

गबन और धोखाधड़ी की आशंका

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कानूनी नजरिए से देखें तो यह मामला केवल विभागीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि धोखाधड़ी, गबन और पद के दुरुपयोग का गंभीर प्रकरण बन सकता है।

लगातार सामने आ रहे घोटालों से जिले में प्रशासन की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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