
2 साल से सब्सिडी का इंतजार, कृषि विभाग के चक्कर काट रहे किसान! योजना थी या कागज़ों का खेल? विभाग पर उठे बड़े सवाल…!
रोल पाइप खरीदा गया, लेकिन सब्सिडी नहीं मिली… अधिकारी बोले- “कोई योजना ही नहीं थी”, तो फिर खरीदी किस योजना के तहत हुई?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के उप संचालक कृषि कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि किसान मनोज श्रीवास और राजेश श्रीवास पिछले लगभग दो वर्षों से रोल पाइप पर मिलने वाली सब्सिडी के लिए कृषि कार्यालय के लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें अनुदान राशि नहीं मिल सकी। किसानों का कहना है कि रोल पाइप शासन की योजना के तहत खरीदा गया था, लेकिन जब सब्सिडी की राशि मिलने का समय आया तो विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “ऐसी कोई योजना ही नहीं थी।” ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि योजना थी ही नहीं, तो किसानों को किस योजना के नाम पर रोल पाइप खरीदवाया गया? और यदि योजना थी, तो सब्सिडी की राशि आखिर गई कहां?


पीड़ित किसानों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे कृषि विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें अलग-अलग जवाब देकर टाल दिया जाता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। मामले में उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय अधिकारी होने के बावजूद वर्षों से लंबित इस मामले का समाधान नहीं होना किसानों में नाराजगी का कारण बन रहा है। किसान पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी समस्या का निराकरण कब होगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
इसी बीच एक और मामला भी सामने आया है। ग्राम सेवक (REO) द्वारा मुट्ठी नमूना (सॉयल/बीज नमूना) लिया गया है, आखिर उस राशि का हिसाब किताब आखिर जाता कहा है…!अब किसान पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि निम्न बिंदुओं पर तत्काल स्थिति स्पष्ट की जाए- रोल पाइप किस योजना के तहत खरीदवाया गया?- संबंधित योजना में सब्सिडी की राशि स्वीकृत हुई थी या नहीं?- यदि राशि स्वीकृत हुई थी तो लाभार्थियों तक क्यों नहीं पहुंची?- मुट्ठी नमूना के नाम पर ली गई राशि का उपयोग कहां किया गया?

यदि किसानों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और किसानों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। किसानों ने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई तथा लंबित सब्सिडी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।
(नोट: यह समाचार किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संबंधित कृषि विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)















