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रोता राजमेरगढ़ की वादियाँ प्रशासन तक नहीं पंहुचा गूंज…विकास तो धरातल पर राह देख रहा फिर भी कलेक्टर को उत्कृष्टता का पुरस्कार, पर्यटन के नाम पर छलावा, मंत्री के आँखों में झोंके धूल…?

मिथलेश आयम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।(खबरो का राजा) : जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कहलाने वाला राजमेरगढ़ आज विकास की उम्मीदों के बीच खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह क्षेत्र अब बदहाल सड़कों, अधूरे कार्यों और प्रशासनिक लापरवाही की पहचान बनता जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि वर्षों से राजमेरगढ़ की सड़कें जर्जर हैं। गड्ढों से भरे रास्ते मानो यात्रियों को हादसे के लिए आमंत्रित करते हैं। बरसात के दिनों में तो हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है, और स्थानीय लोगों को जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी योजनाएँ बनाई गईं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। विडंबना यह है कि इसी हालात के बीच जिले के कलेक्टर को पर्यटन उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा गया है। सवाल यह उठता है कि जब पर्यटन स्थल राजमेरगढ़ की हालत इतनी दयनीय है, तो आखिर यह पुरस्कार किस आधार पर मिला? क्या जिले की वास्तविक तस्वीर पर्यटन मंत्री तक पहुंचाई ही नहीं गई, या फिर उन्हें चमकदार रिपोर्टों के जरिए गुमराह किया गया? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने सिर्फ फाइलों में विकास दिखाने की कोशिश की है। जबकि असली सच्चाई यह है कि राजमेरगढ़ की वादियां आज भी रो रही हैं। टूटी सड़कों, बंद पड़ी सुविधाओं और उपेक्षा के दर्द के साथ। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भी सवाल उठाया है कि यदि जिले को वास्तव में पर्यटन की दिशा में उत्कृष्ट कहा जा रहा है, तो पहले राजमेरगढ़ जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राजमेरगढ़ की जनता अब उम्मीद कर रही है कि उनकी आवाज़ न सिर्फ प्रशासन तक पहुंचे, बल्कि उन तक भी जो पुरस्कार और उपलब्धियों के पीछे असली सच्चाई को देखने से बच रहे हैं।

राजमेरगढ़ पर्यटन के नाम पर छलावा, मंत्री के आँखों में झोंके धूल:- 

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राजमेरगढ़ क्षेत्र आज भी विकास की राह देख रहा है। प्रशासन और पर्यटन विभाग के दावों के बावजूद यहाँ की सड़कों की हालत बेहद खराब है, मूलभूत सुविधाएँ नदारद हैं और पर्यटकों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। बावजूद इसके, अधिकारियों ने कागजों में विकास की झूठी तस्वीर पेश कर पर्यटन मंत्री के आँखों में धूल झोंक दी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब राजमेरगढ़ की वादियाँ खुद विकास को पुकार रही हैं, तब यह उत्कृष्टता किस आधार पर दी गई? क्या यह सिर्फ कागजों में गढ़ा गया विकास है? सच्चाई यह है कि राजमेरगढ़ पर्यटन के नाम पर अब तक केवल छलावा ही साबित हुआ है।

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