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“अधिकार क्षेत्र से बाहर BEO गौरेला की मनमानी — शिक्षकों को सीधे कारण बताओ नोटिस” “पूर्व में भी विवादों और गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं संबंधित बीईओ”

अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर BEO गौरेला कर रहे मनमानी – नियम दरकिनार कर शिक्षकों को जारी किया कारण बताओ नोटिस

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:- गौरेला विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO)संजीव शुक्ला पर एक बार फिर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगे हैं। ताज़ा मामला जिला पंचायत सीईओ द्वारा गौरेला ब्लॉक के स्कूलों के आकस्मिक निरीक्षण से जुड़ा है।

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नियम के अनुसार, जिला पंचायत सीईओ द्वारा निरीक्षण में पाए गए तथ्यों की रिपोर्ट संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को भेजी जाती है। इसके बाद बीईओ को यह प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को प्रेषित करना होता है, और फिर डीईओ द्वारा ही संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। लेकिन इस मामले में गौरेला बीईओ ने प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए सीधे ही शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, जो स्पष्ट रूप से अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई है।

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पूर्व में भी विवादों में रहे हैं बीईओ…?

सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी उक्त बीईओ पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर प्रभाव का इस्तेमाल करने और बड़े पैमाने पर लेन-देन करके एनओसी जारी करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। यहाँ तक कि अधीक्षक पद के लिए भी कथित रूप से “विशेष कृपा” और “बैकडोर डील” के जरिए सिफारिशें करने की चर्चाएं रही हैं।

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प्रशासनिक प्रश्न और संभावित कार्यवाही….?

शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह मामला प्रत्यक्ष रूप से प्रशासनिक अतिक्रमण और नियमों की अवहेलना से जुड़ा है। ऐसे में यदि विभाग चाहे तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के अंतर्गत इन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही संभव है।

शिक्षकों में भी इस बात को लेकर नाराज़गी है कि नियम और प्रक्रिया को दरकिनार करके मनमाने ढंग से नोटिस जारी करना न केवल सेवा शर्तों के विपरीत है, बल्कि यह दबाव बनाने का प्रयास भी माना जा सकता है।

बड़ा सवाल — मेहरबानी क्यों…?

लगातार विवादों और गंभीर आरोपों के बावजूद BEO पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या इनके पीछे किसी का विशेष संरक्षण है, या फिर यह “सिस्टम का खेल” ऐसे ही चलता रहेगा…?

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