
पोड़ी उपरोड़ा BEO पर फिर उठे सवाल: शासन के आदेश के बाद भी प्रधान पाठक का 55–60 किमी दूर संलग्नीकरण!
लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों की अनदेखी का आरोप, पहले भी तीन शिक्षकों के संलग्नीकरण पर कलेक्टर ने जताई थी नाराजगी — अब दुल्लापुर के प्रधान पाठक को मुड़मिसनी भेजने पर विवाद


कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में शिक्षकों के संलग्नीकरण को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी के. राजेश्वर दयाल द्वारा प्राथमिक शाला दुल्लापुर के प्रधान पाठक चंद्रपाल सिंह मरावी को लगभग 55 से 60 किलोमीटर दूर प्राथमिक शाला मुड़मिसनी में संलग्न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह आदेश लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों और पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा जताई गई आपत्ति के बावजूद जारी किया गया है।

मामले ने शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, संलग्नीकरण के नियमों और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह है कि क्या संबंधित संलग्नीकरण नियमानुसार किया गया है और क्या इसके लिए सक्षम अधिकारियों से आवश्यक अनुमति ली गई थी?
पहले भी विवादों में रहा संलग्नीकरण का मामला

जानकारी के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 15 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर जिलों में संलग्न गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर उनके मूल संस्थानों में वापस भेजने के निर्देश दिए थे। आदेश में निर्देशों का पालन नहीं होने पर सेवा संबंधी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
इसके बाद पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में 28 जुलाई के आसपास तीन शिक्षकों के संलग्नीकरण का मामला सामने आया था। आरोप है कि मामला चर्चा में आने के बाद कलेक्टर कोरबा ने बीईओ को तलब कर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद संबंधित आदेश निरस्त कर दिया गया था।
अब एक बार फिर संलग्नीकरण का नया आदेश जारी होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूर्व के आदेशों और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
31 अगस्त के आदेश से दुल्लापुर के प्रधान पाठक मुड़मिसनी में संलग्न
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा के आदेश क्रमांक स्था./2026-27/1113, दिनांक 31 अगस्त 2026 के तहत प्राथमिक शाला दुल्लापुर, संकुल दुल्लापुर के प्रधान पाठक चंद्रपाल सिंह मरावी को प्राथमिक शाला मुड़मिसनी, संकुल अमलीकुंडा में संलग्न किया गया है।
आदेश में 10 अगस्त 2026 को आयोजित स्थायी शिक्षा समिति की बैठक, शाला प्रबंधन समिति मुड़मिसनी तथा ग्राम पंचायत मेरई के उपसरपंच के 25 अगस्त 2026 के प्रतिवेदन का हवाला दिया गया है। बताया गया है कि संबंधित विद्यालय में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या 40 है और वहां एकल शिक्षकीय व्यवस्था होने के कारण शिक्षक की आवश्यकता महसूस की गई।
लेकिन इस निर्णय को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या शाला प्रबंधन समिति और उपसरपंच के प्रतिवेदन के आधार पर नियमित शासकीय शिक्षक को दूसरे संकुल में संलग्न किया जा सकता है? क्या इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी?
55–60 किलोमीटर दूर भेजने पर सवाल
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मुड़मिसनी के विद्यालय में शिक्षक की कमी थी, तो पहले संबंधित संकुल और आसपास के विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए थी। इसके बाद ही नियमानुसार आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए था।
दुल्लापुर से मुड़मिसनी की दूरी लगभग 55 से 60 किलोमीटर बताई जा रही है। ऐसे में यह भी सवाल है कि दूरस्थ विद्यालय में संलग्नीकरण का आधार क्या रहा और इससे मूल विद्यालय की शिक्षकीय व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।हालांकि, संलग्नीकरण की वैधता का अंतिम निर्धारण संबंधित आदेश, लागू विभागीय नियमों और सक्षम अधिकारी की अनुमति की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
स्थानीय शिक्षकों और नागरिकों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा है। उनका कहना है कि यदि संलग्नीकरण संबंधी आदेशों में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो विभाग को इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
मामले में अब प्रमुख सवाल हैं कि क्या बीईओ ने संलग्नीकरण से पहले उच्चाधिकारियों से अनुमति ली थी? क्या उसी संकुल या आसपास के विद्यालयों से शिक्षक की व्यवस्था संभव थी? और क्या इस निर्णय से प्राथमिक शाला दुल्लापुर की पढ़ाई प्रभावित होगी?फिलहाल, इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित विभागीय दस्तावेजों और अधिकारियों के पक्ष से ही सामने आ सकेगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में जांच कराते हैं या नहीं।
नोट: समाचार में लगाए गए आरोपों के लिए संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, होने पर उन्हें भी प्रकाशित किया जाएगा















