
सुशासन के दावों के बीच छतौना पंचायत में 15वें वित्त की राशि पर गंभीर सवाल, CM हेल्पलाइन की जांच प्रक्रिया भी घेरे में
कागजों में विकास का दावा, धरातल पर अधूरे कामों के आरोप; शिकायतकर्ता का आरोप—CM हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद प्रत्येक कार्य का नहीं हुआ पूर्ण भौतिक सत्यापन

मंच निर्माण से लेकर CC रोड, हैंडपंप, मोटर पंप और पानी टंकी तक कई कार्यों की राशि पर सवाल; पुराने कार्य को नया दिखाकर भुगतान और निजी परिसर में हैंडपंप लगाने के आरोपों की भी जांच की मांग
जीशान अंसारी की कलम से

कोटा/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार लगातार सुशासन, पारदर्शिता और गांव-गांव विकास की बात करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पंचायतों को राशि उपलब्ध कराई जाती है। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को सड़क, नाली, पानी, मंच और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
लेकिन ग्राम पंचायत छतौना, जनपद पंचायत कोटा में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए विभिन्न कार्यों को लेकर सामने आई शिकायत ने सरकारी राशि के उपयोग, निर्माण कार्यों की स्थिति और CM हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायतकर्ता द्वारा CM हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 1076 के माध्यम से पंचायत में 15वें वित्त आयोग से कराए गए विभिन्न कार्यों की पूरी आय-व्यय जानकारी उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई थी।
शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया में जगदीश मरावी, अभिषेक अग्रहरी और इंजीनियर विमल जायसवाल के नाम सामने आए। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने जांच के दौरान सभी संबंधित कार्यों का स्थल निरीक्षण कराने की मांग रखी थी। लेकिन समय का हवाला देते हुए सभी कार्यों का एक साथ निरीक्षण संभव नहीं होने की बात कही गई।
यहीं से अब सवाल उठ रहा है कि जब शिकायत ही प्रत्येक निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच को लेकर की गई थी, तो क्या प्रत्येक कार्य का स्वतंत्र और पूर्ण भौतिक सत्यापन किया गया?
सुशासन की तस्वीर कागजों में या धरातल पर?
छत्तीसगढ़ में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए सरकारी राशि खर्च की जाती है।
लेकिन छतौना पंचायत से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि कई कार्य मौके पर अधूरे दिखाई देते हैं, कुछ कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल हैं और कुछ मामलों में पुराने निर्माण को नया कार्य बताकर राशि निकाले जाने की आशंका है।
यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी कार्य को पूर्ण दर्शाया गया है और मौके पर वह कार्य अधूरा मिलता है, तो ऐसी स्थिति में रिकॉर्ड और धरातलीय स्थिति का मिलान करना बेहद जरूरी हो जाता है।
यही कारण है कि शिकायतकर्ता ने पंचायत के 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए सभी कार्यों की दस्तावेजी जांच के साथ-साथ मौके पर भौतिक जांच कराने की मांग की है।
इन कार्यों की राशि को लेकर उठे सवाल
शिकायत में ग्राम पंचायत छतौना में 15वें वित्त आयोग से संबंधित कई कार्यों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न कार्य शामिल हैं—
1. मंच निर्माण — गली को साइन के घर के पास
राशि — ₹99,700
इस मंच निर्माण कार्य को लेकर शिकायत में राशि के उपयोग और मौके पर कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच की मांग की गई है।
2. मंच निर्माण — गली को साइन के घर के पास
राशि — ₹1,50,000
इसी स्थान/कार्य से संबंधित एक अन्य राशि का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि दोनों मदों में किस कार्य के लिए राशि स्वीकृत हुई, कार्यादेश क्या था, वास्तविक निर्माण कितना हुआ और दोनों भुगतानों का आधार क्या रहा।
3. CC रोड निर्माण — बच्चन के घर से सरस्वती आश्रम तक, सोढ़ा खुर्द
राशि — ₹2,53,502
इस CC रोड निर्माण कार्य की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, निर्माण की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री तथा भुगतान की गई राशि का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई है।
4. हैंडपंप खनन एवं स्थापना — संतोष के घर के पास, सोढ़ा खुर्द
राशि — ₹1,09,900
इस कार्य को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विशेष रूप से यह जांच किए जाने की मांग है कि हैंडपंप किस स्थान पर लगाया गया, वह स्थान सार्वजनिक उपयोग का है या निजी परिसर से संबंधित है तथा स्वीकृति किस आधार पर दी गई।
5. मोटर पंप एवं पानी टंकी स्थापना कार्य
राशि — ₹89,900
इस कार्य में भी स्वीकृत राशि, वास्तविक स्थापना, सामग्री और मौके पर उपलब्ध सुविधा का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
6. स्टेशनरी सामग्री
राशि — ₹19,580
स्टेशनरी सामग्री के नाम पर खर्च की गई ₹19,580 की राशि को लेकर भी संबंधित बिल, वाउचर, खरीद रिकॉर्ड और भुगतान विवरण की जांच की मांग की गई है।
7. देवालय के पास हैंडपंप खनन एवं स्थापना
देवालय के पास हैंडपंप खनन एवं स्थापना सहित अन्य कार्यों को भी शिकायत में जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है। इसमें यह देखना जरूरी बताया गया है कि हैंडपंप वास्तव में किस स्थान पर लगाया गया और उसका उपयोग सार्वजनिक रूप से हो रहा है या नहीं।
राशि आहरण के बाद भी काम अधूरे होने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत में कुछ ऐसे निर्माण कार्य हैं, जिनके लिए राशि का भुगतान अथवा आहरण हो चुका है, लेकिन मौके पर कार्य पूरी तरह पूर्ण दिखाई नहीं देता।
कुछ कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ऐसे में जांच के दौरान केवल फाइलों और पंचायत के अभिलेखों पर निर्भर रहने के बजाय मौके पर जाकर निर्माण की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई, उपयोग की गई सामग्री और वास्तविक स्थिति का मापन किया जाना आवश्यक बताया गया है।
पुराने काम को नया दिखाकर राशि निकालने की आशंका
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि पंचायत में कुछ ऐसे कार्य हो सकते हैं, जिनमें पहले से मौजूद निर्माण को ही नया कार्य दर्शाकर राशि निकाले जाने की आशंका है।
यदि ऐसा पाया जाता है तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि—
कार्य वास्तव में कब कराया गया?
कार्य की स्वीकृति किस वर्ष हुई?
कार्यादेश कब जारी हुआ?
माप पुस्तिका में क्या दर्ज है?
भुगतान किस आधार पर किया गया?
मौके पर नया निर्माण हुआ या पुराना निर्माण ही मौजूद है?
इन सभी बिंदुओं की जांच दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण दोनों के माध्यम से किए जाने की मांग की गई है।
एक ही स्थान या समान कार्य पर अलग-अलग मद से भुगतान का सवाल
शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि कुछ समान प्रकृति के कार्यों या एक ही स्थान से जुड़े कार्यों के लिए अलग-अलग मद से राशि आहरित की गई हो सकती है।
ऐसे में पंचायत के कैशबुक, वाउचर, भुगतान रजिस्टर, कार्यादेश, MB और स्वीकृति आदेश का मिलान करने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी एक कार्य के लिए दोबारा भुगतान तो नहीं किया गया।
निजी परिसर में हैंडपंप लगाने का आरोप
मामले का एक महत्वपूर्ण बिंदु हैंडपंप खनन एवं स्थापना से जुड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की सार्वजनिक राशि से होने वाला हैंडपंप कार्य किसी व्यक्ति के घर अथवा निजी परिसर के अंदर कराया गया।
यदि जांच में यह बात सामने आती है, तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि—
क्या उक्त स्थान सार्वजनिक उपयोग के लिए स्वीकृत था?
स्थान का चयन किस आधार पर किया गया?
क्या संबंधित विभाग या पंचायत से इसकी अनुमति थी?
क्या हैंडपंप का उपयोग सभी ग्रामीण कर सकते हैं?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजी रिकॉर्ड और मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
नाली और अन्य निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में
शिकायतकर्ता के अनुसार कुछ नाली एवं अन्य निर्माण कार्यों में भी कार्य पूर्ण नहीं होने के बावजूद भुगतान किए जाने की आशंका जताई गई है।
कहीं काम आधा-अधूरा होने, तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।
ऐसे मामलों में स्वीकृत राशि बनाम वास्तविक कार्य का तुलनात्मक सत्यापन किया जाना जरूरी है।
यदि किसी कार्य की पूरी राशि निकाली गई है तो यह भी देखा जाना चाहिए कि कार्य वास्तव में कितना पूरा हुआ और शेष कार्य क्यों अधूरा है।
CM हेल्पलाइन जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल
CM हेल्पलाइन आम नागरिकों की शिकायत शासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन छतौना पंचायत के मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शिकायत में प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन कराने की स्पष्ट मांग के बावजूद सभी कार्यों का व्यापक स्थल निरीक्षण नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता के अनुसार जांच के दौरान समय की समस्या का हवाला दिया गया।
अब सवाल यह है कि—
क्या शिकायत के प्रत्येक बिंदु की अलग-अलग जांच हुई?
क्या प्रत्येक निर्माण स्थल पर अधिकारी पहुंचे?
क्या मौके की वास्तविक स्थिति का मापन किया गया?
क्या फोटो या जियो-टैग रिकॉर्ड से सत्यापन किया गया?
क्या पंचायत के भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर हुए कार्य का मिलान किया गया?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या शिकायतकर्ता की मूल मांग के अनुसार प्रत्येक कार्य का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन हुआ?
अधिकारी और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यह मामला केवल पंचायत स्तर तक सीमित नहीं है। पंचायत में होने वाले निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, रिकॉर्ड की जांच और शिकायतों के निराकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
इसलिए यह भी जांच का विषय है कि क्या संबंधित अधिकारियों और तकनीकी अमले ने सभी कार्यों की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया था?
यदि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण है और मौके पर अधूरा पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
यदि कार्य की गुणवत्ता निर्धारित मापदंड के अनुरूप नहीं है, तो उसका भुगतान किस आधार पर हुआ?
और यदि पुराने निर्माण को नया दर्शाकर राशि निकाली गई है, तो रिकॉर्ड में उसे स्वीकृति और भुगतान किस स्तर पर मिला?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए।
15वें वित्त की राशि के एक-एक रुपये का हिसाब हो
शिकायतकर्ता और ग्रामीणों की मांग है कि वर्ष 2021-22 से वर्तमान अवधि तक ग्राम पंचायत छतौना को 15वें वित्त आयोग मद से प्राप्त राशि और खर्च की पूरी जानकारी की जांच की जाए।
जांच में निम्न दस्तावेजों को शामिल करने की मांग की गई है—
1. प्रशासनिक स्वीकृति
2. तकनीकी स्वीकृति
3. कार्यादेश
4. माप पुस्तिका (MB)
5. बिल एवं वाउचर
6. भुगतान विवरण
7. कैशबुक एवं संबंधित रजिस्टर
8. सामग्री खरीदी का रिकॉर्ड
9. कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र
10. स्थल की फोटो एवं जियो-टैग रिकॉर्ड
11. प्रत्येक निर्माण कार्य का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन
इसके साथ यह भी देखा जाए कि जिस कार्य के नाम पर जितनी राशि निकाली गई, मौके पर उतना ही कार्य वास्तव में हुआ है या नहीं।
सरकार के सुशासन के दावों की धरातलीय परीक्षा
छतौना पंचायत का मामला केवल एक पंचायत की शिकायत नहीं, बल्कि इस सवाल को सामने रखता है कि सरकारी योजनाओं के लिए जारी राशि का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक किस हद तक पहुंच रहा है।
सरकार सुशासन, पारदर्शिता और विकास की बात करती है। लेकिन इन दावों की वास्तविक परीक्षा सरकारी कार्यालयों की फाइलों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, सड़कों, नालियों, पानी की सुविधाओं और निर्माण स्थलों पर होती है।
यदि कोई कार्य कागज पर पूरा है, लेकिन धरातल पर अधूरा है, तो उस अंतर की जांच होना जरूरी है।
इसी तरह यदि CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होती है, तो शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए प्रत्येक बिंदु का स्पष्ट और प्रमाण आधारित निराकरण होना चाहिए, ताकि लोगों का शिकायत निवारण व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
अब बड़ा सवाल—जांच होगी या मामला रिकॉर्ड तक सीमित रहेगा?
छतौना पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हुए कार्यों को लेकर उठे सवालों का अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र और विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
लेकिन फिलहाल कई सवाल सामने हैं—
क्या 2021-22 से अब तक 15वें वित्त की पूरी राशि का ऑडिट होगा?
क्या प्रत्येक कार्य का मौके पर स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाएगा?
क्या ₹99,700 और ₹1,50,000 के दोनों मंच निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी?
क्या ₹2,53,502 की CC रोड का वास्तविक निर्माण और माप रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा?
क्या ₹1,09,900 के हैंडपंप कार्य की जगह और सार्वजनिक उपयोग की स्थिति की जांच होगी?
क्या ₹89,900 के मोटर पंप एवं पानी टंकी कार्य का मौके पर सत्यापन होगा?
क्या ₹19,580 की स्टेशनरी सामग्री के बिल-वाउचर और खरीद रिकॉर्ड की जांच होगी?
क्या पुराने कार्य को नया दिखाकर राशि निकालने की आशंका की जांच होगी?
क्या निजी परिसर में हैंडपंप लगाने के आरोप की वास्तविकता सामने लाई जाएगी?
और क्या CM हेल्पलाइन शिकायत की जांच प्रक्रिया का भी स्वतंत्र रूप से परीक्षण होगा?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो विभाग को दस्तावेजों और स्थल सत्यापन के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल छतौना पंचायत का मामला यही सवाल पूछ रहा है—सुशासन के दावे कागजों तक हैं या उनका असर वास्तव में गांव की जमीन पर भी दिखाई दे रहा है?















