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मरवाही वनमंडल में सफेद भालू की स्थिति बत्त से बत्तर इसकी जिम्मेदार वन विभाग __वीरेंद्र सिंह बघेल

मरवाही वनमंडल में सफेद भालू की स्थिति बत्त से बत्तर इसकी जिम्मेदार वन विभाग __वीरेंद्र सिंह बघेल

वीरेंद्र सिंह बघेल ने मरवाही वन मंडल पर गंभीर आरोप लगाए है विदित है की बघेल को पहचान एक समाज सेवक और जीव जंतु से बेहद लगाव रखने वाले लोगो में से एक है , पूर्व में भी उन्होंने हाथियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लेमरू प्रोजेक्ट की मांग की थी

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जिसको मरवाही के पूर्व विधायक डॉ के के ध्रुव विधानसभा में रख चुके है ,
आज सफेद भालू की चिंता रखते हुए उन्होंने कहा की मैं
इंसान के साथ जानवर पानी के लिए व्याकुल हैं। खाना-पानी की तलाश में हाथी और भालू जैसे जानवर आक्रामक होकर इंसानी बस्तियों पर लगातार आ रहे हैं। मरवाही वनमण्डल में कुछ सालो से हाथियों और भालुओं के हमले में से कई लोगो की मौत हुई है। कई लोग घायल हुए हैं।
अभी दो दिन पूर्व सफेद भालू के बच्चे पानी के लिए तड़फ रहे थे फिर ग्रामीणों ने पानी पिलाया ,आगे बघेल ने कहा़ की सोशल मीडिया में सफेद भालू की तस्वीर और दुर्दसा देखकर मन से दुखी हुआ ,पानी से तड़फता सफेद भालू के बच्चे । एक बार फिर मरवाही वन मंडल के प्रोजेक्ट भालू प्रोजेक्ट सहित करोड़ों की व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है ,जंगलों में आज भी पानी की व्यवस्था नही खाने के लिए फलदार वृक्ष नही ,आखिर सरकार के हजारों करोड़ों के प्रोजेक्ट क्या पेपर तक सीमित है*
*मरवाही में सफेद भालू का एक इतिहास रहा है
*पहली बार 1996में मिला था मरवाही में सफेद भालू मरवाही के जंगलों में सफेद भालू पहली बार छत्तीसगढ़ बनने से पहले साल 1996 में मिला था। उसे इंदिरा उद्यान पेंड्रा के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया था, लेकिन दुर्लभ प्रजाति का होने के कारण इसे तब मध्यप्रदेश शासन ने भोपाल के चिड़ियाघर भिजवा दिया। जहां वह कई वर्षों तक रहा।
आगे बघेल ने कहा की आखिर कब तक अमूल्य धरोहरो को भ्रष्टाचार की आग में झोंकते रहेंगे ,दुख जब होता है की जंगलों में ना कही पानी है ना खाने के लिए कोई फलदार वृक्ष, आखिर ये जानवर कहा़ जाए ,क्या सरकार के प्रोजेक्ट केवल पेपर तक सीमित रहेगा की धरातल में कुछ दिखेगा ,

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