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“रक्षक ही भक्षक! जंगल में कत्ल, रिसॉर्ट में दावत—हिरण कांड में वन विभाग पर संगीन शक”

रक्षक ही भक्षक! जंगल में कत्ल, रिसॉर्ट में दावत—हिरण कांड में वन विभाग पर संगीन शक”

सूत्रों का सनसनीखेज दावा—बिना अंदरूनी मिलीभगत के नहीं पहुंच सकता था शिकार का मांस, छोटे कर्मचारी गिरफ्तार, बड़े चेहरे अब भी बेनकाब नहीं

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बिलासपुर | 28 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा बेलगहना वनपरिक्षेत्र स्थित कुरदर के एथनिक रिसॉर्ट में पकड़े गए संदिग्ध हिरण मांस कांड ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल अवैध शिकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वन विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर रिसॉर्ट के किचन से पका हुआ संदिग्ध मांस बरामद किया, जिसे हिरण का मांस बताया जा रहा है। मौके से कुक रामकुमार टोप्पो, रिसॉर्ट मैनेजर रजनीश सिंह और कर्मचारी रमेश यादव व संजय वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सरकारी रिसॉर्ट में ‘जंगली दावत’

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जांच में सामने आया है कि संबंधित एथनिक रिसॉर्ट का संचालन पर्यटन मंडल द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं कि सरकारी संरक्षण वाले परिसर में आखिर वन्यजीव का मांस कैसे पहुंचा और खुलेआम पकाया जा रहा था।
सूत्रों का दावा: बिना मिलीभगत संभव नहीं
सूत्रों के अनुसार, जंगल में शिकार से लेकर रिसॉर्ट तक मांस की सप्लाई कोई सामान्य घटना नहीं है। बिना विभागीय लापरवाही या अंदरूनी सहयोग के ऐसा होना संभव नहीं माना जा रहा।
इससे वन विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह गहराने लगा है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मैनेजर ने पल्ला झाड़ा, कुक ने खोली पोल

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पूछताछ के दौरान मैनेजर ने मांस के स्रोत की जानकारी से इनकार करते हुए पूरा दोष कुक पर डाल दिया। वहीं कुक रामकुमार टोप्पो ने बताया कि गांव के एक व्यक्ति द्वारा मांस लाकर दिया गया था और वह रिसॉर्ट के अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए खाना तैयार कर रहा था। जांच जारी, सैंपल भेजा गया लैब
वन विभाग ने जब्त मांस का सैंपल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मांस किस वन्यजीव का है।

बड़े सवाल अब भी कायम, जंगल से रिसॉर्ट तक मांस कैसे पहुंचा?

क्या इस पूरे मामले में कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? क्या विभागीय स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।यह मामला वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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