
फर्जी ST सर्टिफिकेट का बड़ा खेल? 1928 के रिकॉर्ड में ईसाई, फिर कैसे बने गोंड! भिलाई स्टील प्लांट की नौकरी तक पहुंची शिकायत, संभागायुक्त से जांच की मांग
बिलासपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 3 अगस्त। जिले के ग्राम कोटमी कला से अनुसूचित जनजाति (गोंड) के कथित फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का मामला सामने आया है। ग्राम निवासी चंद्रकांत सलाम ने बिलासपुर संभाग के संभागायुक्त को आवेदन प्रस्तुत कर पांच व्यक्तियों के अनुसूचित जनजाति (गोंड) जाति प्रमाण-पत्रों की सक्षम स्तर पर जांच कराने तथा जांच में अनियमितता सिद्ध होने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

आवेदन में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुष्पा राम, सूचित राम, प्रवीण राम, नलिन राम एवं सुरेश राम, सभी पिता साइमन सुखराम, निवासी ग्राम कोटमी कला, द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी एवं दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जनजाति (गोंड) का जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया गया है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1928 के राजस्व अभिलेखों तथा उपलब्ध दाखिल-खारिज रिकॉर्ड में संबंधित परिवार का धर्म/जाति ईसाई दर्ज होने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसके बावजूद वर्तमान में अनुसूचित जनजाति (गोंड) का जाति प्रमाण-पत्र जारी होने पर संदेह व्यक्त करते हुए शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।

आवेदन के अनुसार संबंधित परिवार के जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, उस समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज, राजस्व अभिलेख एवं अन्य मूल रिकॉर्ड का सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षण कराया जाना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि प्रवीण राम एवं नलिन राम, पिता साइमन सुखराम, कथित रूप से इसी अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र के आधार पर भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि जाति प्रमाण-पत्र गलत तथ्यों, कूटरचित दस्तावेजों अथवा भ्रामक जानकारी के आधार पर प्राप्त किए गए हैं, तो यह शासन को गुमराह कर आरक्षण का अनुचित लाभ प्राप्त करने का गंभीर मामला होगा।

शिकायतकर्ता ने संभागायुक्त से मांग की है कि सभी संबंधित जाति प्रमाण-पत्रों की जांच सक्षम जाति सत्यापन समिति से कराई जाए। साथ ही वर्ष 1928 के राजस्व अभिलेख, दाखिल-खारिज रिकॉर्ड एवं अन्य मूल अभिलेखों का परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में प्रमाण-पत्र गलत आधार पर जारी होना सिद्ध होता है तो संबंधित जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी आग्रह किया गया है कि यदि संबंधित व्यक्तियों ने कथित रूप से गलत जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर किसी शासकीय विभाग अथवा सार्वजनिक उपक्रम में नियुक्ति प्राप्त की है, तो संबंधित विभाग को भी नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि संभागायुक्त कार्यालय इस शिकायत पर क्या निर्णय लेता है तथा जांच के आदेश जारी किए जाते हैं या नहीं।
यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।















