
RTE की शिकायत पर 11 महीने से कार्रवाई नहीं, जांच के नाम पर सिर्फ आश्वासन! आखिर किसे बचा रहा शिक्षा विभाग?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत जिले के निजी विद्यालयों में कथित अनियमितताओं और सरकारी राशि के दुरुपयोग की शिकायत पर लगभग 11 महीने बीत जाने के बावजूद जिला शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायतकर्ता द्वारा 4 सितंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया गया था कि जिले के कई निजी विद्यालय RTE के तहत फर्जी तरीके से छात्रों की संख्या दर्शाकर शासन से लाखों-करोड़ों रुपये की प्रतिपूर्ति प्राप्त कर रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कई ऐसे बच्चों के नाम RTE सूची में दर्ज हैं जो वास्तविकता में अन्य निजी अथवा शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया था कि कई विद्यालय वास्तविक प्रवेश से अधिक बच्चों को रिकॉर्ड में दर्शाकर शासन को गलत जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। कई मामलों में अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर भी प्रतिपूर्ति का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, सभी RTE विद्यार्थियों का भौतिक सत्यापन, दोषी विद्यालयों के विरुद्ध मान्यता निरस्तीकरण, राशि की वसूली तथा दंडात्मक कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि आवेदन देने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया कि जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है, लेकिन आज तक न तो किसी समिति के गठन का लिखित आदेश सार्वजनिक किया गया और न ही जांच की कोई रिपोर्ट सामने आई। लगभग 11 महीने बाद भी कार्रवाई शून्य रहने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत निराधार थी तो उसे स्पष्ट रूप से खारिज क्यों नहीं किया गया? और यदि शिकायत प्रथम दृष्टया गंभीर थी तो जांच आज तक पूरी क्यों नहीं हुई? क्या विभाग जानबूझकर मामले को लंबित रखे हुए है, या फिर प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है?
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि जब इतने लंबे समय तक कोई जांच नहीं हुई और कथित समिति का कोई अभिलेख सामने नहीं आया, तो आमजन के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होता है कि कहीं मामला दबाने का प्रयास तो नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में किसी प्रकार के लेन-देन या भ्रष्टाचार का स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और इसकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।

अब जिले के अभिभावकों और आम नागरिकों की नजर इस बात पर है कि जिला शिक्षा विभाग इस गंभीर शिकायत पर कब कार्रवाई करेगा। यदि RTE जैसी महत्वपूर्ण योजना में अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल सरकारी धन की हानि का मामला नहीं होगा, बल्कि गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार माना जाएगा।















