19 लाख का स्कूल बना भ्रष्टाचार का स्मारक! 2 साल से अधूरा भवन, 8 लाख भुगतान का आरोप, बच्चे बरामदे पढ़ने को मजबूर

19 लाख का स्कूल बना भ्रष्टाचार का स्मारक! 2 साल से अधूरा भवन, 8 लाख भुगतान का आरोप, बच्चे बरामदे पढ़ने को मजबूर
मरवाही। मामला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत परासी से सामने आया है। यहां DFM मद से लगभग 19 लाख रुपये की लागत से बनने वाला मिडिल स्कूल भवन पिछले दो वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। भवन निर्माण रुक जाने के कारण मासूम बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मजबूरी में छात्र कभी बरामदे में तो कभी प्राथमिक स्कूल के कमरों में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। कई बार पेड़ के नीचे भी कक्षाएं लगाने की नौबत आ जाती है।

रजनीश तिवारी,जिला शिक्षा अधिकारी
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में केवल लगभग 2 लाख रुपये का काम हुआ, लेकिन इसके बावजूद करीब 8 लाख रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। आरोप है कि सरपंच, सचिव और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और स्कूल भवन आज भी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा होता तो बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलता, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और कथित अनियमितताओं का खामियाजा मासूम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनपद पंचायत के सीईओ छोटे-छोटे मामलों और कम राशि की अनियमितताओं में भी एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देते हैं, तो 19 लाख रुपये की योजना में कथित अनियमितता और लाखों रुपये के भुगतान के बावजूद अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? क्या बड़े मामलों में कार्रवाई के अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं? क्या जिम्मेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है? यह सवाल अब ग्रामीण खुलकर उठा रहे हैं।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सरपंच, सचिव, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच, भुगतान की जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है। अधूरे स्कूल भवन का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा तथा जांच में यदि किसी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल आश्वासन देता है या फिर लाखों रुपये की योजना में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों को कानून के दायरे में लाता है।
















