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सागौन की अवैध कटाई पर कार्रवाई के बाद भी उठे सवाल, रतनपुर वन परिक्षेत्र में ग्रामीणों में नाराजगी

सागौन की अवैध कटाई पर कार्रवाई के बाद भी उठे सवाल, रतनपुर वन परिक्षेत्र में ग्रामीणों में नाराजगी

लंबे समय से कटाई की शिकायतों के बावजूद निगरानी पर सवाल, बीट क्षेत्र से वनकर्मियों की गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में रोष

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जीशान अंसारी की कलम से

बिलासपुर/रतनपुर। रतनपुर वन परिक्षेत्र के जंगलों में सागौन की कथित अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग द्वारा कार्रवाई की गई है। विभाग की टीम ने लकड़ी से लदे वाहन को जब्त कर लकड़ी को राजसात करने की कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, कार्रवाई के बाद भी क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में लंबे समय से पेड़ों की कटाई को लेकर शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं, वहां समय रहते निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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कार्रवाई हुई, लेकिन निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित बीट क्षेत्र में जंगल से लकड़ी कटने की गतिविधियों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण अपने क्षेत्र में लगातार जंगल की स्थिति देखते हैं और उन्हें लंबे समय से पेड़ों की कटाई की जानकारी मिलती रही है। इसके बावजूद वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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हाल ही में रात के समय सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम को देखकर वाहन चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। वाहन की जांच में सागौन के नग सहित अन्य लकड़ी बरामद होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद वाहन और लकड़ी को जब्त कर विभागीय कार्रवाई की गई।

समाचार प्रकाशित होने के बाद भी क्यों नहीं रुकी कटाई?

खास बात यह है कि इस क्षेत्र में जंगलों से अवैध कटाई को लेकर पहले भी समाचार प्रकाशित होते रहे हैं। लगातार खबरों के माध्यम से वन क्षेत्र में हो रही कथित कटाई और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बावजूद यदि उसी क्षेत्र से अब सागौन की लकड़ी से भरा वाहन पकड़ा जाता है, तो यह वन विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बीट क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी कितनी नियमित है, क्या कर्मचारियों द्वारा समय पर गश्त की जाती है और जंगल में पेड़ों की कटाई की सूचना अधिकारियों तक समय पर पहुंचती है—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

ग्रामीणों की मांग—सिर्फ वाहन पकड़ना नहीं, कटाई की जड़ तक पहुंचे विभाग

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कटाई के मामले में केवल वाहन पकड़कर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। विभाग को यह भी पता लगाना चाहिए कि लकड़ी जंगल के किस स्थान से काटी गई, पेड़ों की कटाई कब हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और लंबे समय से चल रही कथित कटाई की गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं हो सकी।

अब ग्रामीणों ने संबंधित बीट क्षेत्र की उच्चस्तरीय जांच, नियमित गश्त की समीक्षा और लंबे समय से हुई पेड़ों की कटाई का स्थल निरीक्षण कराने की मांग उठाई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर लगातार जंगल कटाई की शिकायतें सामने आ रही थीं, तो वन विभाग की टीम को कार्रवाई के लिए लकड़ी से लदा वाहन मिलने तक इंतजार क्यों करना पड़ा? विभाग की कार्रवाई के बाद अब निगाह इस बात पर है कि जांच केवल जब्त वाहन और लकड़ी तक सीमित रहती है या फिर जंगल में कथित अवैध कटाई की पूरी कड़ी तक पहुंचती है।

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