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रिटायरमेंट से पहले ‘उगाही का दबाव’! प्राचार्य संतोष राठौर ने BEO पर रिश्वत और जान से मारने की धमकी के लगाए संगीन आरोप”

रिटायरमेंट से पहले ‘उगाही का दबाव’! प्राचार्य संतोष राठौर ने BEO पर रिश्वत और जान से मारने की धमकी के लगाए संगीन आरोप”

मेडिकल बिल और GPF पासबुक के नाम पर पैसों की मांग, इंकार पर अभद्रता और धमकी — DEO को सौंपी लिखित शिकायत से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

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 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही |जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और दबाव का एक गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय हाई स्कूल बचरवार के प्राचार्य संतोष कुमार राठौर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) संजीव शुक्ला पर रिश्वतखोरी, अवैध उगाही और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत सौंपी है। इस शिकायत के सामने आते ही विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के अनुसार, प्राचार्य राठौर ने अपनी आंखों के ऑपरेशन के लिए लगभग 75 हजार रुपये का मेडिकल बिल प्रस्तुत किया था। आरोप है कि इस बिल को पास कराने के एवज में पहले भी उनसे पैसों की मांग की गई थी। इसके अलावा, वर्तमान में उनकी GPF (जनरल प्रोविडेंट फंड) पासबुक में हस्ताक्षर करने के बदले 5,000 रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी गई।

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प्राचार्य का कहना है कि जब उन्होंने इस अवैध मांग को पूरा करने में असमर्थता जताई, तो BEO संजीव शुक्ला ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। यह आरोप न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी चिंता पैदा करता है।

प्राचार्य संतोष राठौर आगामी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे समय में, जब उन्हें अपने सेवा-निवृत्ति संबंधी लाभों के सुचारू निराकरण की उम्मीद थी, उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे “जीवन भर की सेवा के बाद अपमानजनक स्थिति” बताते हुए DEO से तत्काल हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें समय पर उनके वैधानिक अधिकार मिल सकें।

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इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा जोरों पर है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस शिकायत पर कितनी निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करता है।

अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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