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शाला प्रवेश उत्सव के बीच जीपीएम शिक्षा विभाग पर बड़ा सवाल! अटैचमेंट खत्म फिर भी प्राचार्य बिलासपुर में, बच्चों की पढ़ाई का जिम्मेदार कौन

शाला प्रवेश उत्सव के बीच जीपीएम शिक्षा विभाग पर बड़ा सवाल! अटैचमेंट खत्म फिर भी प्राचार्य बिलासपुर में, बच्चों की पढ़ाई का जिम्मेदार कौन?

मुख्यमंत्री बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाने में जुटे, लेकिन जीपीएम में शिक्षक और प्राचार्य अब भी मूल संस्थाओं से दूर! आखिर किसके संरक्षण में चलता रहा संलग्नीकरण का खेल?

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। प्रदेश में 16 जून से 27 जून तक शाला प्रवेश उत्सव अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर अभियान की सफलता के लिए सहयोग का आह्वान किया है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित हो। लेकिन शाला प्रवेश उत्सव के उत्साह के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे संलग्नीकरण (अटैचमेंट) के मामले गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। राज्य शासन द्वारा अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त किए जाने के बावजूद जिले के कई शिक्षक, प्रधान पाठक और प्राचार्य अब भी मूल पदस्थापना स्थल से बाहर कार्यरत बताए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल गुरुकुल पेंड्रारोड के प्राचार्य जी. ए. अश्वनी कुमार को लेकर उठ रहा है, जो लंबे समय से बिलासपुर जिले में संलग्न बताए जा रहे हैं। गुरुकुल जैसे महत्वपूर्ण विद्यालय में नियमित प्राचार्य की अनुपस्थिति शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। चर्चा भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। बड़ा प्रश्न यह है कि जिन शिक्षकों और अधिकारियों को छात्रों के अध्यापन एवं विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनके मूल संस्थानों में शैक्षणिक कार्य की भरपाई कैसे हो रही है? क्या विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही? जब सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को स्कूलों से जोड़ने का अभियान चला रही है, तब विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों और प्राचार्यों की अनुपस्थिति चिंता का विषय बन गई है।

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अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ सरकार बच्चों को स्कूल लाने के लिए विशेष अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ कई स्कूल शिक्षक और प्राचार्य की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा गुणवत्ता सुधार के दावे कितने प्रभावी होंगे, यह बड़ा सवाल है।

अब जिले के नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि राज्य शासन ने अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त कर दी है, तो फिर जीपीएम जिले के प्राचार्य और अन्य शिक्षक अब तक मूल संस्थाओं में वापस क्यों नहीं लौटे? आखिर किसके संरक्षण में यह व्यवस्था जारी है?

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शाला प्रवेश उत्सव के बीच शिक्षा विभाग बिलासपुर सहित अन्य स्थानों पर संलग्न प्राचार्यों एवं शिक्षकों को उनकी मूल संस्थाओं में वापस भेजने की कार्रवाई करेगा, या फिर वर्षों से चला आ रहा यह अटैचमेंट सिस्टम आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा?

बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की मुहिम तो शुरू हो गई है, लेकिन क्या बच्चों को उनके शिक्षक और प्राचार्य भी वापस मिल पाएंगे? यही सवाल आज पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है

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