
CCRT के 518वें राष्ट्रीय प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने बिखेरी संस्कृति की छटा
सुआ, राउत नाचा और कर्मा की थाप पर झूमे 16 राज्यों के 115 प्रतिनिधि, गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’

नई दिल्ली/रायपुर, 2 सितंबर 2026। सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT), नई दिल्ली में 4 से 25 अगस्त 2026 तक आयोजित 21 दिवसीय 518वें अनुस्थापन पाठ्यक्रम (Orientation Course) में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और विरासत की शानदार प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों से 115 शिक्षकों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ की ओर से 5 महिला और 5 पुरुष शिक्षकों सहित कुल 10 सदस्यीय दल ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।


प्रशिक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ की टीम पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में मंच पर पहुंची। कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ के राज्यगीत से हुई। इसके बाद शिक्षकों ने प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, कृषि, वन उपज, उद्योग, लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों की जानकारी देशभर से आए प्रतिभागियों को दी।
लोक संस्कृति और विरासत का किया प्रदर्शन

राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को अलग-अलग प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा गया। प्रतिनिधियों ने प्रदेश के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय पशु वन भैंसा के बारे में जानकारी दी। वहीं चित्रकोट जलप्रपात, गंगरेल बांध और भिलाई स्टील प्लांट सहित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं औद्योगिक स्थलों से भी प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खानपान में अंगा रोटी, चीला, चौसेला, फरा, ठेठरी और खुरमी की विशेषताओं की जानकारी दी गई। इसके साथ ही स्वागत नृत्य के बाद कर्मा, सुआ, राउत नाचा और शैला नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। प्रस्तुति के समापन पर ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के उद्घोष से पूरा सभागार गूंज उठा।
दिल्ली भ्रमण के साथ NEP 2020 पर मंथन
CCRT के उपनिदेशक डॉ. संदीप शर्मा, क्षेत्र अधिकारी चंद्रमौली त्रिपाठी एवं सहयोगी सदस्यों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षणार्थियों को दिल्ली की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया गया। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय, राष्ट्रीय शिल्प कला संग्रहालय, डॉ. भीमराव अंबेडकर संग्रहालय, भारत मंडपम्, कुतुब मीनार परिसर और हुमायूं का मकबरा जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया गया।
प्रशिक्षण के दौरान NCERT और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में कला, संगीत और संस्कृति की भूमिका पर व्याख्यान दिए। शिक्षकों को मास्क निर्माण, क्राफ्ट वर्क, नृत्य और संगीत जैसी गतिविधियों की कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे विद्यालयों में बच्चों को कला एवं संस्कृति से जोड़ सकें।
समग्र शिक्षा के अधिकारियों का रहा मार्गदर्शन
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले शिक्षकों को राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के अधिकारियों का विशेष मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला। आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, उप संचालक श्री दिनेश कौशिक, सहायक संचालक श्रीमती मंजूलता साहू एवं सहायक कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती राखी सिन्हा के निर्देशन में शिक्षकों को राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की संस्कृति प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की इस प्रस्तुति ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की लोक कला, पारंपरिक नृत्य, खानपान और सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान को प्रभावी ढंग से सामने रखा। उनकी उपलब्धि पर शिक्षा जगत और प्रदेशवासियों में हर्ष का माहौल है।















